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सरकार को हाईकोर्ट से झटका, अवैध भवनों को नियमित करने पर रोक

Tue, 04 Apr 2017 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 04 Apr 2017 12:00 AM IST
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High Court stays regularisation of illegal structures in Himachal Pradesh
हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश ने हाईकोर्ट ने प्रदेश में जहां है, जैसा है वाले भवनों को नियमित करने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और नगर निगम को आदेश दिए हैं कि कोर्ट के आदेशों के बिना जहां है, जैसे है वाले नियमितीकरण संशोधन कानून के तहत आए आवेदन पर अंतिम फैसला न लें। न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने यह आदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभिमन्यु राठौर की जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात पारित किए। 

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कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर याचिका का जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि क्या सरकार ने नियमितीकरण के संशोधित कानून को पास करवाने से पहले विधानसभा पटल पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से समय-समय पर पारित उन आदेशों को भी रखा था जिनके तहत इस तरह के नियमितीकरण को गैरकानूनी व कानून के राज के विपरीत ठहराया गया है।

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प्रार्थी ने याचिका में लगाया गया ये आरोप

High Court stays regularisation of illegal structures in Himachal Pradesh

गौरतलब है कि 24 जनवरी को सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) अधिनियम 2016 राजपत्र में प्रकाशित किया। इस इस कानून के तहत आये आवेदनों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना है। इसमें जैसा है, जहां है की नीति को अपनाते हुए नियमितीकरण करने की योजना है। ग्रीन और हेरिटेज क्षेत्रों में इस कानून को लागू नहीं किया गया है।

जो भवन इस संशोधित कानून के तहत भी नियमितीकरण के लिये पात्र नहीं होंगे उनके बिजली पानी के कनेक्शन काटने और उन्हें गिराने का प्रावधान भी इसमें बनाया गया है। नियमितीकरण फीस भी 400 से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। प्रार्थी अभिमन्यु राठौर की ओर से दायर याचिका में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि इस तरह के कानूनों से अवैध निर्माणों को बढ़ावा दिया जाता है जिससे ईमानदार लोग खुद को असहज अनुभव करते हैं।

याचिका में प्रार्थी ने दिए ये भी तर्क

High Court stays regularisation of illegal structures in Himachal Pradesh

सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में नाकाम हो गई है और कानून तोड़ने वालों के संरक्षण में काम कर रही है। इस तरह के कानूनों से कानून का राज स्थापित नहीं होता। यह केवल दिमाग का इस्तेमाल न किए जाने की निशानी है जो इस तरह के कानून बनाए जा रहे हैं। 

याचिका में उक्त संशोधित कानून को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है। प्रार्थी ने उक्त कानून के तहत आए नक्शों को नियमित करने के लिए आवेदनों को कोर्ट में मंगवाने की गुहार भी लगाई है। प्रार्थी ने उन कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की मांग की है जिनके कार्यक्षेत्र में उनकी जानकारी होते हुए अवैध निर्माण किए गए और किए जा रहे हैं। मामले पर सुनवाई 17 अप्रैल को निर्धारित की गयी है।

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