राजनीतिक सिफारिश के आधार पर किया हेड टीचर का तबादला ने रद्द
बिना किसी प्रशासनिक परामर्श अधिकार के किए गए इस स्थानांतरण आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि केवल किसी कर्मचारी का वास्तविक और ठोस कारणों से स्थानांतरण प्रस्ताव कर सकता है, मगर प्रशासनिक विभाग के अधिकार को हथियाना उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता है।
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राजनीतिक सिफारिश के आधार पर किए हेड टीचर के तबादले को गंभीरता से लेते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने याची बाबू राम की याचिका पर यह फैसला सुनाया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय गिरि सुंदरनगर जिला मंडी के हेड टीचर ने अपने तबादला आदेश को चुनौती दी थी। बिना किसी प्रशासनिक परामर्श अधिकार के किए गए इस स्थानांतरण आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि केवल किसी कर्मचारी का वास्तविक और ठोस कारणों से स्थानांतरण प्रस्ताव कर सकता है, मगर प्रशासनिक विभाग के अधिकार को हथियाना उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। याची को राजकीय विद्यालय सहगल के लिए मंडी जिला के नाचन चुनाव क्षेत्र के विधायक की सिफारिश पर स्थानांतरित कर दिया था। सुनवाई के दौरान इस मामले के रिकॉर्ड से पता चला कि नाचन के वर्तमान विधायक विनोद कुमार ने एक पत्र मुख्यमंत्री को भेजा था, जिसमें 10 कर्मचारियों के तबादले की सिफारिश थी। रिकॉर्ड से आगे खुलासा हुआ कि 25 मार्च, 2021 को विधायक के अनुरोध के अनुसार स्वीकृति के लिए मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया, जिन्होंने इस पर एक नोट संलग्न किया। सभी तबादलों को मंजूरी दे दी गई थी।
उपायुक्त होंगे कुल्लू गुरुद्वारा साहिब संपत्ति के केयर टेकर
वहीं, गुरुद्वारा साहिब भुंतर (कुल्लू) के स्वामित्व वाली संपत्ति की रक्षा और सुरक्षा की दृष्टि से प्रदेश उच्च न्यायालय ने जिलाधीश कुल्लू को केयर टेकर और रिसीवर के रूप में नियुक्त किया है।
दो दशक से अधिक पुरानी दीवानी अपील का फैसला करते हुए कोर्ट ने संपत्ति के प्रबंधन पर अधिकार का दावा करने वाले पक्षकारों को दो सप्ताह की अवधि के भीतर संबंधित संपत्ति को उपायुक्त कुल्लू को सौंपने के आदेश भी दिए। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने उपायुक्त को आदेश दिए कि वह सिख विद्वानों की सहायता से उस परिधि का उचित रखरखाव सुनिश्चित करें, जिसमें पवित्र ग्रंथ साहिब हैं। अदालत ने उपायुक्त को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विधिपूर्वक नियमित रूप से अनुष्ठान जारी रहे। वर्ष 1997 से संबंधित अपील का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने उपरोक्त आदेश पारित किए। इसमें एक परिवार के सदस्यों और गुरु ग्रंथ समिति सदस्यों के बीच गुरुद्वारा ग्रंथ साहिब के प्रबंधन व उसके संबंधित अधिकारों से जुड़ा विवाद अदालत के समक्ष उठाया गया था।