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250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में हाईकोर्ट का सीबीआई और हिमाचल सरकार को नोटिस

Sat, 19 Oct 2019 11:48 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 19 Oct 2019 11:48 AM IST
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High court issues notice to CBI and Himachal govt in Rs 250 crore scholarship scam
फाइल फोटो

हिमाचल के शिक्षा विभाग में सामने आए 250 करोड़ से ज्यादा राशि के छात्रवृत्ति घोटाले में हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के दायरे में आए 2772 संस्थानों में से मात्र 22 की जांच पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है।

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इस बाबत दो हफ्ते में सीबीआई से सील बंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशालय से भी जवाबतलबी की है। मामले पर आगामी सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
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मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने बिलासपुर निवासी श्याम लाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए। जनहित में दायर याचिका में प्रार्थी ने घोटाले के बारे में अमर उजाला में प्रकाशित विभिन्न खबरों को भी संलग्न किया।
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याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय जांच एजेंसी को छानबीन में पता चला है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों व निजी शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति हड़पने के लिए बाकायदा एक रैकेट चल रहा था। 

इसके लिए अधिकारी निजी शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति जारी करने के लिए दस फीसदी तक कमीशन लेते थे। खबरों के मुताबिक जांच में पता चला है कि कमीशन का यह खेल होटलों में चलता था।

यहां पर स्कॉलरशिप जारी कराने के एवज में निजी संस्थान विभाग के अधिकारियों को कमीशन का पैसा देते थे। सीबीआई अब यह पता लगा रही है कि इस खेल में कितने लोग शामिल थे और कमीशन कितने लोगों में कैसे बंटता था।

इस बात की तस्दीक निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों से पूछताछ में भी हो चुकी है। इसके बाद ही शिक्षा विभाग के अधीक्षक अरविंद राज्टा सीबीआई के रडार पर आए।

सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि स्कॉलरशिप की स्वीकृति से संबंधित फाइलों को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। निचले स्तर के अधिकारी, कर्मचारी फाइलों को अपने स्तर पर ही मार्क कर देते थे।

जांच में यह भी पता चला है कि नियमों के विपरीत निजी ई मेल आईडी से छात्रवृत्ति के काम को अंजाम दिया जाता था। उधर, सीबीआई की ओर से अदालत से गुहार लगाई गई कि चूंकि वह मामले कि जांच कर रही है तो इस स्थिति में सील कवर में रिपोर्ट दायर करने की अनुमति दी जाए, ताकि उनके द्वारा की गई

जांच सार्वजनिक न हो। अदालत ने सीबीआई की इस गुहार को स्वीकार किया और सील कवर में रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए। याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा निदेशक और सीबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है।

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