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एचपीसीए के लिए अहम दिन, अवैध कब्जे के मामले पर आएगा फैसला

Tue, 24 May 2016 10:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 24 May 2016 10:26 AM IST
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High court hearing on illegal encroachment by HPCA.
सरकार के अनुसार प्रार्थियों ने शिक्षा विभाग के नाम पर दर्ज सरकारी भूमि पर कब्जा किया और उस पर स्थित भवन को गिराया।

हाईकोर्ट में एचपीसीए के खिलाफ अवैध कब्जे करने और सरकारी काम में बाधा डालने के मामलों में प्राथमिकी रद्द करने की गुहार वाली याचिकाओं पर सुनवाई 24 मई के लिए टल गई है। हाईकोर्ट ने एचपीसीए, इसके अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के खिलाफ धर्मशाला कोर्ट में चल रहे मामलों पर आगामी कार्रवाई पर रोक लगा रखी है।

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न्यायाधीश राजीव शर्मा ने एचपीसीए और अनुराग ठाकुर की याचिका पर सुनवाई के बाद मामलों से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया था। याचिका के अनुसार सरकार ने राजनीतिक द्वेष से एचपीसीए पर तरह-तरह के मामले दर्ज किए हैं। कांग्रेस चार्जशीट के दबाव में एचपीसीए पर 1941 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध कब्जा करने का झूठा मामला बनाया है।
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प्रार्थियों के अनुसार सरकार ने एचपीसीए को 49118 वर्ग मीटर भूमि लीज पर दी है। उनका कब्जा केवल 45959 वर्ग मीटर पर है। यदि एचपीसीए के कब्जे को देखा जाए तो उनके पास अभी भी 3158 वर्गमीटर भूमि आवंटित भूमि से कम है। जिन खसरा नंबरों पर कब्जे की बात कही जा रही है वो किसी गलती से लीज दस्तावेज में अंकित नहीं हुए।
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यह मामला अवैध कब्जे का नहीं, गलती का मामला है। इसे राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त कर सुधारा जा सकता है। आरोप है कि उन पर 414 वर्गमीटर निजी भूमि को कब्जाने का भी आपराधिक मामला दर्ज किया है। सरकार के अनुसार प्रार्थियों ने शिक्षा विभाग के नाम पर दर्ज सरकारी भूमि पर कब्जा किया और उस पर स्थित भवन को गिराया।

दूसरे मामले में अनुराग ठाकुर व संजय शर्मा द्वारा सरकारी कार्य में बाधा डालने पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार वाली याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर, पीआरओ संजय शर्मा को सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में निचले कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।


आरोपियों को मामले में पूछताछ के लिए 24 अक्तूबर 2013 की बजाय 31 अक्तूबर, 2013 को एसपी ऑफिस बुलाया गया था। ये लोग लाव लश्कर के साथ 24 अक्तूबर को ही एसपी ऑफिस पहुंच गए। आपत्तिजनक नारे लगाए और सरकारी कार्य में बाधा डाली तो सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रार्थियों के अनुसार उनके खिलाफ  ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जो यह साबित कर सके।

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