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लावारिस कुत्तों के मामले पर हाईकोर्ट सख्त: कहा- केवल टीकाकरण काफी नहीं, नसबंदी ही एकमात्र स्थायी समाधान

Thu, 15 Oct 2026 06:50 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 15 Oct 2026 06:50 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि लावारिस कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए नसबंदी पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।अदालत ने कहा कि नियमित नसबंदी ही दीर्घकालिक रूप से उनकी संख्या घटाने का एकमात्र जरिया है।

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High Court firm on the issue of stray dogs: States that vaccination alone is not enough, sterilization is the
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट के बढ़े मामल पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि लावारिस कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए नसबंदी पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।अदालत ने कहा कि नियमित नसबंदी ही दीर्घकालिक रूप से उनकी संख्या घटाने का एकमात्र जरिया है। राज्य सरकार केवल टीकाकरण पर ध्यान देकर मुख्य मकसद से भटक रही है।

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आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि नसबंदी के मुकाबले टीकाकरण पर ज्यादा जोर है। राज्य सरकार की ओर से दायर अनुपालन हलफनामे के अनुसार राज्य में वर्तमान में 31 एनिमल बर्थ कंट्रोल केंद्र काम कर रहे हैं, जिनमें से 17 शहरी निकायों और 14 पशुपालन संस्थानों के अधीन हैं। लाहौल-स्पीति में कुत्तों की कम संख्या के कारण केंद्र नहीं है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में 12 नए एबीसी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 के बीच प्रदेश में 26,564 लावारिस कुत्तों का टीकाकरण किया गया, जबकि नसबंदी केवल 3,709 कुत्तों की ही हुई। अदालत ने मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश देते हुए इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को तय की है।

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रिकाॅर्ड में बताया गया है कि किन्नौर जिले में इस अवधि के दौरान 559 कुत्तों को वैक्सीन तो लगाई गई, लेकिन नसबंदी का आंकड़ा शून्य रहा। शिमला नगर निगम क्षेत्र और आसपास के इलाकों में 4,000 से अधिक कुत्तों के टीकाकरण का दावा किया गया, लेकिन 5 अक्तूबर 2026 तक केवल 316 कुत्तों की ही नसबंदी की जा सकी। न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि बिलासपुर और नेरचौक जैसे नगर निगमों में एबीसी केंद्र अभी भी अस्थायी रूप से चल रहे हैं। वहीं, ठियोग में पोर्टेबल शेल्टरों के सहारे काम चलाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ निजी डॉक्टरों या एनजीओ को काम आउटसोर्स करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार लावारिस कुत्तों की आबादी पर लगाम लगाने के लिए हर केंद्र पर स्थायी डॉक्टरों का होना अनिवार्य है, जो नियमित रूप से नसबंदी कर सकें।

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