{"_id":"6ad0df0d6069c2897b028280","slug":"the-government-has-been-asked-to-explain-its-approval-for-the-construction-of-a-17-story-building-in-vikasnagar-shimla-news-c-399-1-sh11006-2380-2026-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: विकासनगर में 17 मंजिला भवन के निर्माण \nकी मंजूरी देने पर सरकार से जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: विकासनगर में 17 मंजिला भवन के निर्माण की मंजूरी देने पर सरकार से जवाब तलब
विज्ञापन
डिजिटल
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा-इमारत का निर्माण प्रथम दृष्टया में लगता है शिमला डेवलपमेंट प्लान का उल्लंघन
याचिका में लगे हैं मकानों और पेड़ों को नुकसान के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के विकासनगर (विजय नगर) में बन रहे 14 से 17 मंजिला व्यावसायिक परिसर के निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस पर सरकार और आवास बोर्ड से जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश आवास बोर्ड से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि पहाड़ी ढलान पर इतनी ऊंची इमारत बनाने की मंजूरी किन परिस्थितियों में दी गई। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि 14 से 17 मंजिला इमारत का निर्माण प्रथम दृष्टया शिमला डेवलपमेंट प्लान का उल्लंघन प्रतीत होता है और यह काम रोकने का पर्याप्त आधार हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने की बात कहे जाने के बाद अदालत ने फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगाने के बजाय सरकार और आवास बोर्ड से जवाब मांगा है।
अदालत ने सख्त हिदायत दी कि खोदाई या पेड़ों की कटाई से स्थानीय लोगों के जान-माल को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही उनके आने-जाने का रास्ता किसी भी स्थिति में बंद नहीं होना चाहिए। अदालत ने एसडीएम (शहरी), शिमला को तुरंत मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई पेड़ खतरनाक स्थिति में दिखाई देता है, तो उसे काटने के लिए तत्काल आदेश जारी किए जाएं, ताकि वन विभाग 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर सके। मामले की अगली सुनवाई 20 अक्तूबर को होगी। विकासनगर में एचपी पेट्रोल पंप के पास रहने वाले बीली राम ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि शिमला डेवलपमेंट प्लान के तहत पार्किंग सहित अधिकतम साढ़े चार मंजिला इमारत बनाने की अनुमति है। इसके बावजूद यहां 14 से 17 मंजिला इमारत बनाने की मंजूरी दे दी गई।
विज्ञापन
याचिका के अनुसार इमारत और सड़क निर्माण के लिए उचित तकनीक का इस्तेमाल किए बिना पहाड़ी की कटाई की जा रही है। इससे मिट्टी और मलबा नीचे स्थित मकानों पर गिर रहा है और घरों को काफी नुकसान पहुंचा है। सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई भी की जा रही है, जिससे पेड़ों के आसपास के घरों की छतों पर गिरने का खतरा बना हुआ है।
रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी
सुनवाई के दौरान सरकार और निर्माण कंपनी के वकीलों ने अदालत को बताया कि इस इमारत के निर्माण की मंजूरी राज्य मंत्रिमंडल ने आईआईटी तिरुपति और एसपीए विजयवाड़ा की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद दी है। इसके अलावा, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से भी आवश्यक मंजूरियां ली गई हैं। निर्माण कार्य कर रही कंपनी के वकील ने अदालत को बताया कि आसपास के मकानों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं। इसके बावजूद यदि किसी के घर को नुकसान पहुंचता है, तो कंपनी उसकी भरपाई करेगी और प्रभावितों को मुआवजा देगी।
विज्ञापन
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा-इमारत का निर्माण प्रथम दृष्टया में लगता है शिमला डेवलपमेंट प्लान का उल्लंघन
याचिका में लगे हैं मकानों और पेड़ों को नुकसान के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के विकासनगर (विजय नगर) में बन रहे 14 से 17 मंजिला व्यावसायिक परिसर के निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस पर सरकार और आवास बोर्ड से जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश आवास बोर्ड से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि पहाड़ी ढलान पर इतनी ऊंची इमारत बनाने की मंजूरी किन परिस्थितियों में दी गई। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि 14 से 17 मंजिला इमारत का निर्माण प्रथम दृष्टया शिमला डेवलपमेंट प्लान का उल्लंघन प्रतीत होता है और यह काम रोकने का पर्याप्त आधार हो सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने की बात कहे जाने के बाद अदालत ने फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगाने के बजाय सरकार और आवास बोर्ड से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
अदालत ने सख्त हिदायत दी कि खोदाई या पेड़ों की कटाई से स्थानीय लोगों के जान-माल को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही उनके आने-जाने का रास्ता किसी भी स्थिति में बंद नहीं होना चाहिए। अदालत ने एसडीएम (शहरी), शिमला को तुरंत मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई पेड़ खतरनाक स्थिति में दिखाई देता है, तो उसे काटने के लिए तत्काल आदेश जारी किए जाएं, ताकि वन विभाग 24 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर सके। मामले की अगली सुनवाई 20 अक्तूबर को होगी। विकासनगर में एचपी पेट्रोल पंप के पास रहने वाले बीली राम ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि शिमला डेवलपमेंट प्लान के तहत पार्किंग सहित अधिकतम साढ़े चार मंजिला इमारत बनाने की अनुमति है। इसके बावजूद यहां 14 से 17 मंजिला इमारत बनाने की मंजूरी दे दी गई।
विज्ञापन
याचिका के अनुसार इमारत और सड़क निर्माण के लिए उचित तकनीक का इस्तेमाल किए बिना पहाड़ी की कटाई की जा रही है। इससे मिट्टी और मलबा नीचे स्थित मकानों पर गिर रहा है और घरों को काफी नुकसान पहुंचा है। सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई भी की जा रही है, जिससे पेड़ों के आसपास के घरों की छतों पर गिरने का खतरा बना हुआ है।
रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी
सुनवाई के दौरान सरकार और निर्माण कंपनी के वकीलों ने अदालत को बताया कि इस इमारत के निर्माण की मंजूरी राज्य मंत्रिमंडल ने आईआईटी तिरुपति और एसपीए विजयवाड़ा की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद दी है। इसके अलावा, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से भी आवश्यक मंजूरियां ली गई हैं। निर्माण कार्य कर रही कंपनी के वकील ने अदालत को बताया कि आसपास के मकानों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं। इसके बावजूद यदि किसी के घर को नुकसान पहुंचता है, तो कंपनी उसकी भरपाई करेगी और प्रभावितों को मुआवजा देगी।