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HP High Court: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, बिना बीएड ही होगी शास्त्री अध्यापकों की भर्ती

Thu, 22 Sep 2022 12:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 22 Sep 2022 12:00 AM IST
सार

 हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में शास्त्री शिक्षकों की भर्ती बिना बीएड शैक्षणिक योग्यता के ही होगी। हाईकोर्ट ने बीएड को अनिवार्य करने की मांग को खारिज कर दिया है।

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High Court dismissed the petition, recruitment of Shastri teachers will be done without B.Ed.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बीएड धारकों की याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में शास्त्री शिक्षकों की भर्ती बिना बीएड शैक्षणिक योग्यता के ही होगी। हाईकोर्ट ने बीएड को अनिवार्य करने की मांग को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया है। बीएड धारक सतीश कुमार और अन्य की ओर से दलील दी गई थी कि राज्य सरकार ने शास्त्री शिक्षक के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में एनसीटीई की अधिसूचना के तहत जरूरी संशोधन नहीं किया है। एनसीटीई ने वर्ष 2011 में अधिसूचना जारी कर शास्त्री शिक्षक के लिए बीएड की अनिवार्य योग्यता निर्धारित की है। 

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चयनित उम्मीदवारों की ओर से दलील दी गई थी कि एनसीटीई की वर्ष 2011 में जारी अधिसूचना नियमों के विपरीत है। एनसीटीई ने नियमों को दरकिनार कर केंद्र सरकार की सिफारिश पर शास्त्री शिक्षक के लिए बीएड की अनिवार्य योग्यता निर्धारित की है। राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने दलील दी थी कि शिक्षक की योग्यता निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार सक्षम है। सरकार ने शास्त्री शिक्षक के भर्ती एवं पदोन्नित नियम एनसीटीई की वर्ष 2010 की अधिसूचना के तहत ही बनाए हैं। 
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 29 (1) और 23 (1) के तहत एनसीटीई के पास ही शिक्षक के लिए न्यूनतम पात्रता निर्धारित करने का अधिकार है। यदि योग्यता निर्धारित करते समय नियमों के अनुरूप प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है तो राज्य सरकार एनसीटीई की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। अदालत ने पाया कि शास्त्री शिक्षक के लिए बीएड योग्यता निर्धारित करते समय एनसीटीई ने धारा 3, 12 और 12ए को उल्लंघन किया है।

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गौरतलब है कि चयन आयोग ने वर्ष 2020 में शास्त्री शिक्षकों के 1182 पद विज्ञापित किए थे। ये पद 50 प्रतिशत बैच वाइज और 50 प्रतिशत सीधी भर्ती से भरे जाने थे। हालांकि इसमें से 582 पद विभाग ने बैचवाइज भर दिए हैं, लेकिन आयोग की ओर से भरे जाने वाले 582 पदों पर शिक्षकों को अभी तक नियुक्ति नहीं दी गई है। 23 दिसंबर, 2021 को आयोग ने शास्त्री का परिणाम घोषित किया था। 

 
हाईकोर्ट में कंप्यूटर शिक्षक भर्ती मामले पर सुनवाई टली
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कंप्यूटर शिक्षक भर्ती मामले पर सुनवाई टल गई है। समय के अभाव के कारण इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले को न्यायाधीश अजय मोहन गोयल के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में कंप्यूटर शिक्षकों के उस भर्ती नियम को चुनौती दी है, जिसके तहत विभाग ने पांच वर्ष के अनुभव को भर्ती के लिए योग्य शर्त बनाया है। शिक्षकों ने अदालत से गुहार लगाई है कि उनकी सेवाओं को नियमित करने के आदेश पारित किए जाएं। कंप्यूटर शिक्षक भर्ती मामले पर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2013 से स्थगन आदेश पारित किए हैं। उसके बाद से कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पाई है।  करीब 1300 कंप्यूटर शिक्षक प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में वर्ष 2002 से सेवाएं दे रहे हैं। 

 

चालक भर्ती की उत्तर कुंजी पर सवाल, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

राज्य बिजली बोर्ड में 100 चालकों की भर्ती के लिए बीते दिनों हुई लिखित परीक्षा की उत्तर कुंजी पर सवाल उठ गए हैं। बोर्ड की चालक आउटसोर्स यूनियन ने इस बाबत हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर दी है। उत्तर कुंजी को संशोधित करने की मांग उठाई गई है। यूनियन के महासचिव अमन कुमार ने बताया कि लिखित परीक्षा की बोर्ड प्रबंधन की ओर से उपलब्ध करवाई पहली उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज करवाने के लिए आठ सितंबर को एक दिन का समय दिया गया था।

15 सितंबर को उपलब्ध करवाई गई अंतिम उत्तर कुंजी में आधे से अधिक सवालों के जवाब बदल दिए गए। पहली उत्तर कुंजी के आधार पर जो सवाल ठीक थे। अब दूसरी उत्तर कुंजी में गलत बताए गए हैं। उन्होंने बताया कि अंतिम उत्तर कुंजी में अन्य भी कई खामियां है। बोर्ड प्रबंधन को इस बाबत लिखित में अवगत भी करवाया गया है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों के हित में संशोधित उत्तर कुंजी जारी होनी चाहिए। 

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