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पशु बलि मामले में हाईकोर्ट का निर्णय सुरक्षित
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 25 Sep 2014 08:33 AM IST
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प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा पशुबलि पर रोक लगाए जाने के आदेश पर पुन: विचार करने के आग्रह करने को लेकर दायर आवेदन पर कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति सतीश शर्मा और न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रखा है। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि धार्मिक अनुष्ठानों में पशु बलि एक लंबे अर्से से चली आ रही है और इसके साथ लोगों की आस्थाओं के अलावा भावनाएं भी जुड़ी है।
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अदालत द्वारा लोगों की आस्था पर इस तरह की रोक लगाना अनुचित है। सरकार की ओर से दलील दी गई कि कानूूनी प्रावधान में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए छूट रखी गई है और कानूनन इस तरह की रोक लगाना उचित नहीं है।
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दूसरी और प्रार्थी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि अदालत द्वारा लगाई गई रोक सही है और पशु बलि न दिए जाने से धार्मिक भावनाएं आहत नहीं हो सकती है। इस तरह का मुद्दा अदालत के समक्ष उठाना भी गलत है कि यदि पशु बलि नहीं दी जाती को देवता नाराज हो जाएंगे।
भगवान श्रीरघुनाथ के छड़ीबरदार एवं हिलोपा प्रदेश अध्यक्ष महेश्वर सिंह ने बुधवार को पशु बलि मामले में हाईकोर्ट में कुल्लू जिला कारदार संघ अध्यक्ष दोत राम ठाकुर सहित अपना पक्ष रखा।
महेश्वर सिंह ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने उनका पक्ष गंभीरता से सुना। हिलोपा युवा सेना अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि महेश्वर सिंह ने विश्वास जताया है कि न्यायालय देव समाज व हिमाचल की संस्कृति के हित में अपना निर्णय देगा।