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हिमाचल में भूमि अधिग्रहण की अधिक कीमत ने फंसाईं कई परियोजनाएं

Sat, 14 Mar 2020 05:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 14 Mar 2020 05:58 PM IST
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High cost of land acquisition delayed many projects in Himachal
- फोटो : अमर उजाला

भू अधिग्रहण की अधिक कीमत के चलते प्रदेश में कई परियोजनाएं फंस गई हैं। पिंजौर-नालागढ़ फोरलेन की तरह धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना के प्रभावित भी बहुत अधिक मुआवजा मांग रहे हैं। विधायक राजेंद्र राणा और रमेश धवाला के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा सदन में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना में कुल 427 परिवार प्रभावित व चार परिवार विस्थापित होंगे। इन परिवारों को दी जाने वाली मुआवजा राशि का निर्धारण अभी नहीं हुआ है। राशि का नियमानुसार निर्धारण होने के बाद मुआवजा प्रदान कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना 66 मेगावाट की है।

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निर्माण के लिए परियोजना की अनुमानित लागत के अनुसार 668 करोड़ रुपये का प्रावधान है। एसजेवीएन ने परियोजना का निर्माण करना है। 67 फीसदी निजी भूमि परियोजना के लिए खरीद ली गई है। शेष की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि सर्किल रेट अधिक होने से भू अधिग्रहण की समस्या आ रही है। देखा गया है कि जहां भी बड़े प्रोजेक्ट आने होते हैं, वहां कई लोग रातों-रात भूमि खरीदते हैं।  फिर अधिग्रहण में ज्यादा पैसा मांगा जाता है। यही लोग धरना-प्रदर्शन भी करते हैं। मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं को प्रभावित करने वाले लोगों से जन प्रतिनिधियों को बात कर मामला सुलझाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि भू अधिग्रहण के लिए किसी भी व्यक्ति को डराने धमकाने का काम नहीं किया जा रहा है। इससे पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने भू अधिग्रहण का पैसा नहीं मिलने और लोगों को डराने का आरोप लगाया। विधायक रमेश धवाला ने कहा कि 22 सालों से इस प्रोजेक्ट की प्रक्रिया जारी है। राजनीतिक मंशा से लोगों को प्रोजेक्ट के खिलाफ खड़ा नहीं करना चाहिए। 

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ड्रोन कैमरे से स्वां नदी की निगरानी का विचार नहीं

उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने बताया है कि स्वां नदी की निगरानी के लिए डिजिटल व ड्रोन कैमरों से निगरानी करने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। ऐसा प्रयोग वर्ष 2018-19 के दौरान उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में किया जा चुका है, जो सफल नहीं रहा।

नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के सवाल का लिखित जवाब देते हुए उद्योग मंत्री ने बताया कि खनन पट्टा धारकों को खनन पट्टा क्षेत्र का सीमांकन कर बुर्जियां स्थापित करना अनिवार्य होता है।

ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाती है। उन्होंने कहा कि पट्टाधारक को पोकलेन व जेसीबी द्वारा खनन पट्टा क्षेत्र में खनन करने की कोई भी अनुमति नहीं दी जाती है।

333.52 वर्ग किलोमीटर बढ़ा हिमाचल में वन आवरण

 भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की भारत वन रिपोर्ट 2019 के अनुसार हिमाचल प्रदेश के वन आवरण में वर्ष 2017 से 2019 के बीच 333.52 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। यह जानकारी दरंग से विधायक जवाहर ठाकुर के सवाल के लिखित जवाब में वन मंत्री ने दी है। वन मंत्री ने बताया कि वन आवरण की वृद्धि में नजदीक रहने वाले स्थानीय निवासियों की भी अहम भूमिका रहती है।

बताया कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत केंद्र सरकार द्वारा सरकार द्वारा प्रायोजित 13 मूलभूत सुविधाओं के लिए संबंधित वन मंडल अधिकारी के स्तर पर वन भूमि के प्रत्यावर्तन का प्रावधान किया है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क व पीने के पानी की सुविधा शामिल है। हालांकि, इस प्रावधान का स्थानीय लोगों के वन आवरण की वृद्धि में सहयोग से सीधा संबंध नहीं है। 

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तीन साल में 34 बिजली कर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत

हिमाचल में बीते तीन साल के दौरान राज्य बिजली बोर्ड के 34 कर्मियों की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है। इनमें 5 आउटसोर्स कर्मी भी थे। 11 कर्मियों के परिवारों को करुणामूलक आधार पर नौकरी दे दी गई है। 14 मामले प्रगति पर हैं जबकि 9 कर्मियों ने नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं किया। 34 में से 23 कर्मियों के परिवार पेंशन के दायरे में आते हैं जबकि 11 अन्य को न्यू पेंशन स्कीम में डाला गया है।

ठियोग से विधायक राकेश सिंघा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बिजली कर्मियों को चार लाख मुआवजा दिया जाता है जबकि करंट लगने से अपाहिज हुए व्यक्ति को दो लाख दिया जाता है। मजदूर रोशन लाल का मामला कोर्ट में चल रहा है लेकिन सरकार उसके परिवार को दो लाख देगी।

परवाणू-सोलन फोरलेन का 84 फीसदी काम पूरा

राष्ट्रीय राजमार्ग परवाणू-सोलन फोरलेन का काम 84.60 फीसदी पूरा कर लिया है। कुछ क्षेत्रों में भूमि अवाप्ति में देरी, पेड़ों के कटान पर एनजीटी की रोक और डगशाई में सेना भूमि के हस्तांतरण में विलंब के चलते निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। विधायक जगत सिंह के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सोलन से ढली तक का काम दो चरणों में होना है।

सोलन से कैथलीघाट तक 12.50 फीसदी काम हो चुका है। इस कार्य को मई 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कैथलीघाट से ढली तक अभी एक प्रतिशत काम हुआ है। केंद्र सरकार ने इस बाईपास सेक्शन को दो लेन की जगह फोरलेन मानक के अनुसार बनाने को कहा है। केंद्रीय मंत्री ने एनएचएआई को तीन माह के भीतर बिडिंग प्रोसेस पूरी करने को कहा है। राज्य सरकार को निर्माण गिराने, मुआवजा राशि देने और पेड़ों की कटाई करने को कहा है।

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