देखा है ऐसा दफ्तर, खिड़कियों में गत्ते दीवारों पर घास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औपनिवेशिक वास्तुकला की गौरवमयी शैली का प्रतिनिधित्व करती 1910 में बनाई गई टाउन हाल बिल्डिंग मरम्मत को तरस रही है। नगर निगम दफ्तर की इस बिल्डिंग की अधिकांश खिड़कियां टूट चुकी हैं। सीढ़ियां जर्जर हाल में है।
दीवारों पर घास जम गई है। खिड़कियों में शीशे लगाने की बजाय लोहे की शीट्स, गत्ते लगाए हैं। खिड़कियों की बीडिंग भी टूट चुकी है। उपमहापौर के दफ्तर को जाने वाली सीढ़ियां अंतिम सांसें गिन रही हैं।
महापौर संजय चौहान के कार्यालय समेत कई अन्य शाखाओं में पानी टपकता है। बिल्डिंग के जीर्णोद्धार का प्लान और बजट दोनों तैयार हैं लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
लैप्स हो जाएंगे 30 करोड़
निगम दफ्तर को शिफ्ट करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलना जीर्णोद्धार के आडे़ आ रहा है। सरकार नगर निगम को एक जगह पर्याप्त स्थान मुहैया नहीं करवा पा रही है। महापौर भी एक ही जगह पूरे दफ्तर को शिफ्ट करने पर अड़े हैं।
विवाद जारी रहा था तो एशियन डेवलेपमेंट बैंक से स्वीकृत 30 करोड़ की राशि भी लैप्स हो जाएगी। पर्यटन विभाग को यहां जीर्णोद्धार का काम करना है।
सोमवार को महापौर संजय चौहान और उपमहापौर टिकेंद्र पंवर की मुख्य सचिव पी मित्रा के साथ दोपहर ढाई बजे सचिवालय में बैठक है। बैठक में टाउन हाल के जीर्णोद्धार का काम शुरू करने और निगम दफ्तर को शिफ्ट करने पर फैसला हो सकता है।