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मुख्यमंत्री सहारा योजना से मरीजों को दें मदद : सिंह
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योजना में शामिल हैं गंभीर बीमारियों के रोगी
बोले, कई माह से नहीं मिल रही रोगियों को मदद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में हिमोफिलिया रोगियों को पूर्व सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई वित्तीय मदद नहीं मिल पा रही है। इन रोगियों के उपचार के लिए लगने वाले निशुल्क इंजेक्शन भी नहीं मिल रहे हैं।
हिमोफिलिया रोगी सोसायटी के महासचिव एवं संस्थापक समर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत गंभीर बीमारी पार्किसन्स, घातक कैंसर, पक्षघात, मांस पेशियों के डिस्ट्राॅफी, हिमोफिलिया, क्राॅनिक रिनल फेलियर और स्थायी रूप से विकलांगों के लिए मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत मरीजों को हर माह कुछ राशि दी जाती थी। अब यह राशि कई माह से नहीं मिल रही। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। छह लाख से कम रिक आय वालों के लिए दी जाने वाली इस आर्थिक मदद के न मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को उपचार करवाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। समर सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से दी जाने वाली इस मदद से परिजनों को मरीज के अस्पताल में आने जाने का खर्च पूरा करने में मदद होती थी। हिमोफिलिया के ही प्रदेशभर में करीब तीन सौ मरीजों को यह मदद नहीं मिल रही है।
हिमोफिलिया के मरीजों को उपचार करवाने पर 35 से 40 हजार खर्च करने पड़ रहे हैं। हिमोफिलिया से ग्रसित तीन वर्षीय बच्चे के पिता विक्की चौहान ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री सहारा योजना के लिए आवश्यकता दस्तावेज विभाग में जमा करवाए हैं, लेकिन अभी तक आर्थिक मदद मिलना शुरू नहीं हुई है। इस रोग में खून के थक्के नहीं बनते हैं, जिससे चोट लग जाने पर खून बहना बंद नहीं होता है। इसके लिए फेक्टर दवा का इंजेक्शन दिया जाता है।
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बोले, कई माह से नहीं मिल रही रोगियों को मदद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में हिमोफिलिया रोगियों को पूर्व सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई वित्तीय मदद नहीं मिल पा रही है। इन रोगियों के उपचार के लिए लगने वाले निशुल्क इंजेक्शन भी नहीं मिल रहे हैं।
हिमोफिलिया रोगी सोसायटी के महासचिव एवं संस्थापक समर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत गंभीर बीमारी पार्किसन्स, घातक कैंसर, पक्षघात, मांस पेशियों के डिस्ट्राॅफी, हिमोफिलिया, क्राॅनिक रिनल फेलियर और स्थायी रूप से विकलांगों के लिए मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत मरीजों को हर माह कुछ राशि दी जाती थी। अब यह राशि कई माह से नहीं मिल रही। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। छह लाख से कम रिक आय वालों के लिए दी जाने वाली इस आर्थिक मदद के न मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को उपचार करवाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। समर सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से दी जाने वाली इस मदद से परिजनों को मरीज के अस्पताल में आने जाने का खर्च पूरा करने में मदद होती थी। हिमोफिलिया के ही प्रदेशभर में करीब तीन सौ मरीजों को यह मदद नहीं मिल रही है।
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हिमोफिलिया के मरीजों को उपचार करवाने पर 35 से 40 हजार खर्च करने पड़ रहे हैं। हिमोफिलिया से ग्रसित तीन वर्षीय बच्चे के पिता विक्की चौहान ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री सहारा योजना के लिए आवश्यकता दस्तावेज विभाग में जमा करवाए हैं, लेकिन अभी तक आर्थिक मदद मिलना शुरू नहीं हुई है। इस रोग में खून के थक्के नहीं बनते हैं, जिससे चोट लग जाने पर खून बहना बंद नहीं होता है। इसके लिए फेक्टर दवा का इंजेक्शन दिया जाता है।
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