हिमाचल: हमीरपुर ड्रोन ग्रांट मामले में प्राचार्य की शिकायत पर एफआईआर, सेना की कॉल के बाद शुरू हुई थी पड़ताल
हमीरपुर के राजकीय बहुतकनीकी संस्थान बड़ू के छात्र सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ रुपये की ड्रोन ग्रांट मिलने के दावे की जांच संस्थान तक सेना की ओर से संपर्क किए जाने के बाद शुरू हुई। प्राचार्य चंद्रशेखर के अनुसार, संस्थान को रक्षा अधिकारियों के नाम से कुछ ईमेल मिले थे और छात्र के पास भी संबंधित दस्तावेज थे।
विस्तार
छात्र सर्वेश शर्मा के 3.5 करोड़ रुपये की ड्रोन ग्रांट के दावे की सच्चाई जानने के लिए राजकीय बहुतकनीकी संस्थान बड़ू के प्राचार्य चंद्रशेखर ने खुद मामले की पड़ताल शुरू करवाई। संस्थान को सेना की ओर से फोन आने के बाद इस प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। बाद में रक्षा क्षेत्र की संस्था डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) ने ग्रांट मंजूर होने से इनकार कर दिया। इसके बाद प्राचार्य की शिकायत पर सदर थाना हमीरपुर में एफआईआर दर्ज की गई।
प्राचार्य चंद्रशेखर के अनुसार, संस्थान को रक्षा अधिकारियों के नाम से कुछ ईमेल प्राप्त हुए थे। छात्र सर्वेश शर्मा के पास भी ऐसे दस्तावेज थे, जिन्हें रक्षा मंत्रालय से संबंधित बताया गया था। 16 अक्तूबर को सेना की ओर से संस्थान को फोन आया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू की। 27 अक्तूबर को सेना के अधिकारियों ने छात्र का रिकॉर्ड मांगा और उससे बातचीत भी की।
सर्वेश शर्मा ने दावा किया था कि उनके 'रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट स्वीकृत हुई है। इस परियोजना को भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने से जोड़कर प्रचारित किया गया था। हालांकि, 28 अक्तूबर को डीआईओ ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर बताया कि उसके रिकॉर्ड में सर्वेश शर्मा या उनसे जुड़े किसी स्टार्टअप के लिए ऐसी कोई ग्रांट मंजूर नहीं की गई है।
पुलिस कथित ग्रांट मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों, करीब 40 पन्नों के अनुबंध, ईमेल और डिजिटल संदेशों की जांच कर रही है। शुरुआती आशंका है कि छात्र को ऑनलाइन माध्यम से ग्रांट स्वीकृत होने का भरोसा दिलाया गया। हालांकि, दस्तावेजों के पीछे किसकी भूमिका है, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
इसी मामले के बीच सर्वेश शर्मा बुधवार को हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें पहले हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार दिया गया और बाद में चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया। फिलहाल उनका उपचार जारी है। पुलिस ने संस्थान पहुंचकर हॉस्टल परिसर का निरीक्षण किया और प्राचार्य, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों से जानकारी जुटाई। छात्र के गिरने की परिस्थितियों की अलग से जांच की जा रही है। अभी तक इस घटना और कथित ग्रांट धोखाधड़ी के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
मामले के सामने आने के बाद हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी संस्थान प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभागीय स्तर पर यह पता लगाने की प्रक्रिया चल रही है कि प्रोजेक्ट और कथित ग्रांट से जुड़े दस्तावेज संस्थान तक किस तरह पहुंचे और उनकी पुष्टि के लिए क्या कदम उठाए गए थे। फिलहाल पुलिस की जांच का केंद्र कथित ग्रांट मंजूरी के दस्तावेज, ईमेल और डिजिटल संवाद हैं। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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