कहीं इस बेटी के बुलंद हौसले की उड़ान को रोक न दें गरीबी की जंजीरें
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भले ही हिमाचली बेटी हिना का परिवार गरीबी से जूझ रहा है, फिर भी इस होनहार बेटी के हौसले बुलंद हैं। एशियन गेम्स में देश के लिए मेडल जीतने का सपना पाले हिना प्रदेश का नाम ऊंचा करना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक तंगी की जंजीरें राह का रोड़ा बन रही हैं। हिना स्टेट लेवल पर दो बार प्रदेश को दूसरा स्थान दिला चुकी हैं।
शिमला जिले के चियोग के कढरब गांव की हिना ने पुणे में हुई राष्ट्रीय क्रॉस कंट्री में प्रदेश को दूसरा स्थान दिलाया। अब उनका चयन एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप के लिए हुआ है। सड़क हादसे में पिता इंद्र सिंह की मौत के बाद हिना की गरीब मां लक्ष्मी ने छह बच्चों को पढ़ाने-लिखाने की जिम्मेवारी संभाली।
खेतीबाड़ी कर हिना को आगे बढ़ने में हरसंभव मदद की। हिना 9वीं कक्षा से लंबी दूरी की दौड़ में राज्य स्तर पर पहला, राष्ट्रीय स्तर की पाइका और राष्ट्रीय क्रॉस कंट्री स्पर्धाओं में नाम कमा चुकी हैं।
बेटी नाम कमाए, बस यही इच्छा: लक्ष्मी
पुणे से एशियन क्रॉस कंट्री अंडर-20 (6 किलोमीटर) स्पर्धा के लिए चयनित हिना को आधिकारिक तौर पर कन्फर्मेशन का इंतजार है। वह इन दिनों घर में पनामा (यूएसए) में होने वाली चैंपियनशिप के लिए पासपोर्ट आदि तैयार कर रही हैं। पिछले चार साल से हिना साई धर्मशाला में प्रशिक्षण ले रही हैं।
साई कोच महेंद्र सैणी, केहर सिंह पटियाल और शिक्षक राजेंद्र सिंह मानते हैं कि हिना में देश के लिए मेडल जीतने की क्षमता है। हिना की मां लक्ष्मी अकसर बीमार रहने के बावजूद खेतों में पसीना बहाकर अपना, सास और तीन बच्चों का खर्च पूरा कर रही हैं। वे चाहती हैं कि बेटी देश के लिए नाम कमाए, मगर घर की आर्थिक स्थिति खराब होने से असहाय हो जाती हैं।