बागवानों को भारी नुकसान: मौसम की मार से हिमाचल का सेब सीजन आधा, 1.70 करोड़ पेटी तक सिमटा उत्पादन
पिछले वर्ष जहां राज्य में करीब 3.50 करोड़ पेटियों का कुल उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार पैदावार करीब 1.70 करोड़ पेटियों में ही सिमटने का अनुमान है।
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हिमाचल प्रदेश में इस बार सेब सीजन आधा ही रह गया है। पिछले वर्ष जहां राज्य में करीब 3.50 करोड़ पेटियों का कुल उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार पैदावार करीब 1.70 करोड़ पेटियों में ही सिमटने का अनुमान है। यानी एक साल में सेब की पैदावार में करीब 1.80 करोड़ तक पेटियों की गिरावट आने जा रही है। मौसम की बेरुखी ने सेब बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इसका असर केवल बागवानी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि सेब कारोबार से जुड़े परिवहन, पैकेजिंग, मंडियों और प्रदेश के बाजारों पर भी पड़ा है। कमजोर फसल से शिमला समेत कई क्षेत्रों के कारोबार में 30 से 35 फीसदी तक गिरावट हुई है। यही नहीं, इससे सर्राफा बाजार भी प्रभावित हुआ है।
अधिकांश क्षेत्रों में सेब तुड़ान का काम पूरा
आधिकारिक तौर पर सेब सीजन 31 अक्तूबर को समाप्त होना था, लेकिन इसे दस दिन आगे बढ़ा दिया गया है। अब 10 नवंबर को सेब सीजन औपचारिक रूप से संपन्न माना जाएगा। हालांकि, प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में सेब की तुड़ान का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल स्पीति और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से ही सेब बाजार में पहुंच रहा है। बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि प्रदेश में अभी तक करीब 1.40 करोड़ पेटियां ही बाजार में पहुंच पाई हैं। उन्होंने बताया कि कुल उत्पादन का आकलन करते समय मंडियों में पहुंचे सेब के अलावा मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस), सीए स्टोर, राज्य कृषि विपणन बोर्ड और एपीएमसी के माध्यम से की गई खरीद को भी शामिल किया जाता है। इन सभी माध्यमों से हुई खरीद और बाजार में पहुंचे सेब को जोड़ने के बाद इस वर्ष कुल उत्पादन करीब 1.70 करोड़ पेटियों तक रहने का अनुमान है।
छह साल में सबसे कम उत्पादन
वर्ष सेब उत्पादन
2021 3.05 करोड़ पेटियां
2022 3.36 करोड़ पेटियां
2023 2.11 करोड़ पेटियां
2024 2.51 करोड़ पेटियां
2025 3.49 करोड़ पेटियां
2026 (अनुमानित) 1.70 करोड़ पेटियां
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फबारी से प्रभावित हो रहा सीजन
हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि विभाग भले ही नुकसान का आकलन करीब 1,000 करोड़ रुपये के आसपास कर रहा हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे कहीं गंभीर है। इस बार प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था को 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।
शिमला के कारोबार में 30 से 35 फीसदी तक गिरावट
सेब सीजन कमजोर रहने का असर अब शिमला समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के कारोबारियों पर भी दिखाई देने लगा है। हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि सेब सीजन कमजोर होने का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। शिमला में ही कारोबारियों की बिक्री में 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि शिमला का आम कारोबारी काफी हद तक सेब बहुल क्षेत्रों से आने वाले बागवानों और ग्रामीण लोगों की खरीदारी पर निर्भर रहता है। सेब सीजन के दौरान बागवानों के हाथ में पैसा आने से बाजार में खरीदारी बढ़ती है। सेब की फसल कमजोर रहने से इन लोगों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है।
सोने-चांदी की खरीद पर भी पड़ा आंशिक असर
हिमाचल प्रदेश सर्राफा एवं स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष अतुल टांगरी ने कहा कि इस बार सेब सीजन कमजोर रहने का असर सोने और चांदी की खरीद पर भी आंशिक रूप से पड़ा है। सेब बागवानों की आमदनी प्रभावित होने के कारण खरीदारी पर असर देखने को मिला है। हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट से ग्राहकों को राहत भी मिली है। उन्होंने कहा कि दाम कम होने के कारण लोग खरीदारी के लिए बाजार पहुंच रहे हैं।