मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आयकर मामले की सुनवाई टली
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की वर्ष 2009-2010 के आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट करने के इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के आदेशों को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई 18 सितंबर के लिए टल गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई।
अपीलकर्ता वीरभद्र सिंह ने इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल के 8 दिसंबर 2016 को पारित आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वीरभद्र सिंह ने आयकर ट्रिब्यूनल के 8 दिसंबर 2016 के आदेशों के खिलाफ अपील दायर कर उनकी आयकर रिटर्न की दोबारा असेसमेंट पर रोक लगाने की गुहार लगाई है।
कोर्ट ने 20 जनवरी को पारित आदेशों में दोबारा असेसमेंट किए जाने पर रोक तो नहीं लगाई थी, मगर यह स्पष्ट किया था कि विभाग अपने निर्णय के अनुसार आगामी कार्रवाई जारी रख सकता है। उनकी अंतिम कार्रवाई इस अपील के अंतिम निपटारे पर निर्भर करेगी।
अब विभाग का कहना है कि उन्होंने वीरभद्र सिंह की आयकर रिटर्न का दोबारा से असेसमेंट कर लिया है, इसलिए इस अपील में कुछ भी निर्णय के लिए नहीं बचता। आयकर विभाग की दलील है कि अब प्रार्थी चाहे तो वह अपनी दोबारा असेस की गई आय को सही फोरम में चुनौती दे सकता है।
वीरभद्र सिंह की ओर से दलील दी गई कि कोर्ट ने आयकर रिटर्न के पुन: असेसमेंट को अपील के अंतिम निपटारे पर निर्भर ठहराया था, इसलिए ट्रिब्यूनल के आदेशों पर हाईकोर्ट अपना निर्णय देने की पर्याप्त शक्तियां रखता है।
हाईकोर्ट ने टेंडर रद्द करने की प्रक्रिया को बताया गलत
प्रदेश हाईकोर्ट ने पौध संरक्षण उपकरणों की खरीद के लिए जारी टेंडर को बेवजह रद्द कर उसकी री - टेंडर किए जाने के मामले में प्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के उच्च अधिकारियों को चेतावनी जारी की है। कोर्ट ने कहा है कि आगे से वे अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में ज्यादा सावधानी बरतें।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने आरएसआर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह चेतावनी दी। कोर्ट ने एग्रो इंडस्ट्री के संबंधित अथॉरिटी द्वारा प्रार्थी से संबंधित टेंडर से जुड़ी प्रक्रिया पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने अपने आदेशों की प्रति मुख्य सचिव के ध्यानार्थ लाने के आदेश भी दिए। मामले के अनुसार प्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कृषि, बागवानी इत्यादि विभागों के लिए इस वित्तीय वर्ष में पौध संरक्षण उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे।
प्रार्थी सहित कुल 10 कंपनियों ने इसमें भाग लिया। प्रार्थी की न्यूनतम बोली पाई गई, लेकिन टेंडर में कुछ कटिंग होने का बहाना बनाते हुए उसका टेंडर गलत ढंग से रद्द कर दिया गया। मामला हाईकोर्ट में लंबित होते हुए इन उपकरणों की खरीद के लिए रि टेंडर कर दिए। कोर्ट ने प्रार्थी के टेंडर को रद्द करने की प्रक्रिया को गलत पाया।