{"_id":"6a95825fa1b7af5c280a1679","slug":"hearing-on-hpus-old-audit-paras-now-set-for-the-14th-shimla-news-c-19-sml1002-778836-2026-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: एचपीयू के पुराने ऑडिट पैरा की अब 14 को होगी सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: एचपीयू के पुराने ऑडिट पैरा की अब 14 को होगी सुनवाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दशकों से लंबित आपत्तियों के निपटारे की तैयारी तेज, विभागों को सात अगस्त तक की स्थिति पर जवाब देने के निर्देश
जवाब में देरी पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी तय
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में वर्षों से लंबित महालेखाकार की ऑडिट आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया तेज हो गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 14 सितंबर को होने वाली तदर्थ समिति की बैठक के लिए सभी विभागों को संशोधित जवाब जमा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में लंबित ऑडिट पैरों (अनियमितताओं या गलतियों) की समीक्षा और उनके निपटारे पर चर्चा होगी। उच्च शिक्षा विभाग से मिली सूचना के अनुसार तदर्थ समिति की बैठक का दूसरा चरण 14 सितंबर को तय किया है। इसमें महालेखाकार की लंबित ऑडिट आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। विश्वविद्यालय की संकलन शाखा ने सोमवार को इस संबंध में नए आदेश जारी किए। सभी विभागों, कार्यालयों, केंद्रों और संस्थानों को जवाब अपडेट करने को कहा है, इन्हें सात सितंबर तक तैयार करना होगा। जवाब में संतुष्टिपूर्ण तथ्यों और आवश्यक दस्तावेजों को शामिल करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय ने यह निर्देश जून से जारी मानक संचालन प्रक्रिया के तहत दिए हैं। इससे पहले भी पुराने ऑडिट पैरों के निपटारे को लेकर लगातार पत्र और अनुस्मारक जारी किए जा चुके हैं।
संकलन शाखा ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल शाखा से संपर्क करने को कहा है। अधिकारी अपने कार्यालय से जुड़े लंबित ऑडिट पैरों का पूरा विवरण यहां से प्राप्त कर सकेंगे। इसका उद्देश्य बैठक से पहले सभी मामलों की स्थिति स्पष्ट करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जवाब में लापरवाही को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है। परिपत्र के अनुसार जवाब में देरी या कमी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। गलत या अधूरे जवाब से होने वाली प्रशासनिक, कानूनी या वित्तीय जटिलताओं की जिम्मेदारी तय होगी। विभागाध्यक्ष या प्रभारी अधिकारी को इसके लिए व्यक्तिगत और पूरी तरह जिम्मेदार माना जाएगा। विश्वविद्यालय ने सभी संबंधित इकाइयों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
जवाब में देरी पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी तय
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में वर्षों से लंबित महालेखाकार की ऑडिट आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया तेज हो गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 14 सितंबर को होने वाली तदर्थ समिति की बैठक के लिए सभी विभागों को संशोधित जवाब जमा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में लंबित ऑडिट पैरों (अनियमितताओं या गलतियों) की समीक्षा और उनके निपटारे पर चर्चा होगी। उच्च शिक्षा विभाग से मिली सूचना के अनुसार तदर्थ समिति की बैठक का दूसरा चरण 14 सितंबर को तय किया है। इसमें महालेखाकार की लंबित ऑडिट आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। विश्वविद्यालय की संकलन शाखा ने सोमवार को इस संबंध में नए आदेश जारी किए। सभी विभागों, कार्यालयों, केंद्रों और संस्थानों को जवाब अपडेट करने को कहा है, इन्हें सात सितंबर तक तैयार करना होगा। जवाब में संतुष्टिपूर्ण तथ्यों और आवश्यक दस्तावेजों को शामिल करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय ने यह निर्देश जून से जारी मानक संचालन प्रक्रिया के तहत दिए हैं। इससे पहले भी पुराने ऑडिट पैरों के निपटारे को लेकर लगातार पत्र और अनुस्मारक जारी किए जा चुके हैं।
संकलन शाखा ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल शाखा से संपर्क करने को कहा है। अधिकारी अपने कार्यालय से जुड़े लंबित ऑडिट पैरों का पूरा विवरण यहां से प्राप्त कर सकेंगे। इसका उद्देश्य बैठक से पहले सभी मामलों की स्थिति स्पष्ट करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जवाब में लापरवाही को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है। परिपत्र के अनुसार जवाब में देरी या कमी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। गलत या अधूरे जवाब से होने वाली प्रशासनिक, कानूनी या वित्तीय जटिलताओं की जिम्मेदारी तय होगी। विभागाध्यक्ष या प्रभारी अधिकारी को इसके लिए व्यक्तिगत और पूरी तरह जिम्मेदार माना जाएगा। विश्वविद्यालय ने सभी संबंधित इकाइयों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन