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आय से अधिक संपत्ति मामले में सीएम वीरभद्र को नोटिस

Tue, 27 Oct 2015 08:49 AM IST
Updated Tue, 27 Oct 2015 08:49 AM IST
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Hearing on cm virbhadra singh disproportionate assets case in supreme court.

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से सीबीआई की ओर से दायर की गई दो याचिकाओं पर जवाब देने के आदेश जारी किए हैं। सीबीआई ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ पर रोक लगाई गई है।

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सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति एफएमआई खलीफुल्ला और यूयू ललित की खंडपीठ ने राज्य सरकार को भी इस संबंध में नोटिस जारी किया है। याचिकाओं पर अगली सुनवाई पांच नवंबर को रखी गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी की इस दलील को मंजूर नहीं किया है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए।
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सिब्बल, चिदंबरम ने की वीरभद्र मामले की पैरवी

Hearing on cm virbhadra singh disproportionate assets case in supreme court.

सीबीआई ने एक ट्रांसफर पिटिशन और एक विशेष लीव पिटिशन को भी एपेक्स कोर्ट में दायर किया है, जिसमें इस मामले को हिमाचल प्रदेश से दिल्ली के लिए हस्तांतरित करने का अनुरोध किया गया है और प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने को कहा है। सीबीआई ने दलील दी है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अक्तूबर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने पर रोक लगाई थी और छानबीन तथा चालान पेश करने के दौरान पूछताछ में बुलाने से पूर्व भी अदालत की अनुमति लेने के आदेश जारी किए थे। वीरभद्र सिंह और प्रतिवादियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम, डा. राजीव धवन, विवेक तन्खा, श्रवण डोगरा आदि ने की।

सुनवाई से खुद को अलग रखने में एकसमान नजरिया अपनाएं जज: सुप्रीम कोर्ट

Hearing on cm virbhadra singh disproportionate assets case in supreme court.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मामलों की सुनवाई से खुद अलग रखने के मामलों में जजों को एकसमान नजरिया अपनाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के सामने यह बात तब आई जब सीबीआई की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ के एक जज ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के मामले की सुनवाई से खुद को अलग रखा और बाद में उसी मामले पर सुनवाई करते हुए उन्हें राहत दी।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एफएमआई कलिफुल्ला और यूयू ललित की पीठ ने कहा, ‘अगर आप किसी मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते हैं तो फिर दूसरे की भी मत कीजिए।’ पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई न करने में एकसमान नजरिया अपनाना चाहिए। यह पीठ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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