आठ जुलाई तक टली एचपीयू के कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देने के मामले की सुनवाई
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के चांसलर और राज्यपाल की ओर से इस मामले में जवाब दायर के अनुसार कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी इस बात से अनभिज्ञ थी कि प्रो. सिकंदर कुमार के पास कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन स्कीम में निदेशक का पद बतौर अतिरिक्त कार्यभार था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई आठ जुलाई के लिए टल गई है। पिछले आदेशों के अनुसार प्रदेश सरकार ने याचिका का जवाब दायर किया लेकिन यह कोर्ट के समक्ष नहीं था। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रेवाल दुआ की एकलपीठ के समक्ष इस मामले को लेकर सुनवाई हुई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के चांसलर और राज्यपाल की ओर से इस मामले में जवाब दायर के अनुसार कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी इस बात से अनभिज्ञ थी कि प्रो. सिकंदर कुमार के पास कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन स्कीम में निदेशक का पद बतौर अतिरिक्त कार्यभार था।
सर्च कमेटी को दिए फॉर्म में इसका उल्लेख नहीं किया गया था। प्रो. सिकंदर ने अपने आवेदन में नोशनल एवं वास्तविक पदोन्नति के बारे में भी विशेष रूप से नहीं लिखा था जिसके कारण ये तथ्य सर्च कमेटी के ज्ञान में नहीं था। विश्विद्यालय ही प्रो. सिकंदर के शैक्षणिक योग्यता व अनुभव के बारे में अच्छे से बता सकता है। प्रार्थी धर्मपाल ने याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुलपति की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई है।
याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि प्रतिवादी कुलपति को यूजीसी द्वारा जारी रेगुलेशन के तहत 19 मार्च 2011 को प्रोफसर के पद पर पदोन्नत किया गया था। 29 अगस्त 2017 को हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के लिए आवेदन यूजीसी के नियमानुसार आमंत्रित किए गए। प्रतिवादी ने चयन कमेटी को गुमराह करते हुए अपने आवेदन में अनुभव के बारे में गलत तथ्य दिए। प्रार्थी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाईं है कि प्रतिवादी को आदेश दिए जाए कि वह एचपीयू के वाइस चांसलर की नियुक्ति के लिए अपनी योग्यता अदालत को बताए और यदि उनकी योग्यता यूजीसी के रेगुलेशन के विपरीत पाई जाती है तो उस स्थिति में उसकी नियुक्ति रद्द की जाए।