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प्रशांत भूषण मामले में फैसला अब 17 को

Mon, 15 Sep 2014 08:34 PM IST
Updated Mon, 15 Sep 2014 08:34 PM IST
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hearing in court regarding prashant bhushan case.

पालमपुर के कंडवाड़ी में कुमुद भूषण एजूकेशनल सोसाइटी को शैक्षणिक संस्थान के भवन निर्माण के लिए लीज पर दी गई जमीन मामले में उपायुक्त न्यायालय धर्मशाला में सोमवार को फैसला टल गया। उपायुक्त कोर्ट ने मामले को लेकर अब 17 सितंबर को सुनवाई रखी है।

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उपायुक्त के जिला से बाहर होने के चलते फैसले को लेकर अब अगली तारीख पड़ी है। उपायुक्त सी पालरासू का कहना है कि 17 सितंबर को मामले को लेकर फैसला सुना दिया जाएगा। गौरतलब है कि कंडवाड़ी के एक चाय बागान में तत्कालीन भाजपा सरकार ने आम आदमी पार्टी के नेता एवं प्रख्यात अधिवक्ता प्रशांत भूषण की मां के नाम पर कुमुद भूषण एजूकेशनल सोसाइटी के नाम से 4.68 हेक्टेयर जमीन खरीदने को अनुमति दी थी। भूमि की सेल डीड मार्च 2010 में की गई थी।
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सेल डीड के अनुसार सोसाइटी को निजी जमीन शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने के लिए दी गई थी। लेकिन, सोसाइटी ने दो साल में जमीन पर कोई भवन नहीं बनाया। इस पर फरवरी 2012 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने एजूकेशनल सोसाइटी को धारा 118 के अंतर्गत भूमि सुधार एवं टेनेंसी अधिनियम के तहत नोटिस जारी कर दिया।
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2013 में कांग्रेस ने मामले में जांच बैठाई

hearing in court regarding prashant bhushan case.

कांग्रेस तब विपक्ष में थी। तब कांग्रेस ने प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए सोसाइटी को जमीन खरीदने की अनुमति दी थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सोसाइटी को दी गई निजी जमीन राजस्व रिकार्ड में चाय बागान के नाम पर दर्ज थी।

नियमानुसार चाय बागान की जमीन गैर कृषक को किसी और गतिविधि के लिए नहीं बेची जा सकती। वहीं, प्रशांत भूषण ने इस आरोप को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। 2013 में कांग्रेस सत्ता में आई और उसने तत्कालीन सरकार के नोटिस के आधार पर कुमुद भूषण एजुकेशनल सोसाइटी को जमीन देने के मामले में जांच बैठा दी।

कांग्रेस ने इस मामले को अपनी चार्जशीट में भी डाला था। जांच के बाद मामला धारा 118 की प्रोसिडिंग के तहत डीसी कोर्ट धर्मशाला में चला गया। दिसबंर 2013 को मामले की पहली सुनवाई हुई थी। इसके बाद 2013 में अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने वीरभद्र सिंह के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। दिल्ली हाईकोर्ट में अब मामले की सुनवाई चल रही है।

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