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Shimla News: पांच माह में 28 टीबी रोगियों की मौत, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां बनीं कारण
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स्वास्थ्य विभाग ने 1,393 टीबी मरीजों को किया नोटिफाई, जिला शिमला के 626 मामले
जनवरी से अगस्त के बीच 28,008 संदिग्ध मरीजों की स्वास्थ्य विभाग ने की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में पांच महीनों में 28 क्षय रोगियों की मौत हुई है। इसके पीछे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां कारण बनी हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौत के कारणों का खुलासा किया गया है। हालांकि, मृत्यु दर राष्ट्रीय आंकड़े के अनुसार कम है और चार फीसदी है। इसमें सबसे कम उम्र की 36 वर्षीय टीबी रोगी महिला भी है। महिला चौथी बार क्षय रोग पॉजिटिव हुई थी।
क्षय रोग के साथ किडनी की भी बीमारी थी। उपचाराधीन महिला की क्षय रोग के साथ किडनी में दिक्कत आने से मौत हो गई। वहीं, चिड़गांव खंड से एक, जुब्बल कोटखाई से एक, कुमारसैन से एक, मशोबरा से पांच, मतियाना से तीन, ननखड़ी से एक, नेरवा से एक, रामपुर से चार और शिमला शहरी क्षेत्र से 11 टीबी मरीजों की मृत्यु हुई। जिले में 1393 क्षय रोगियों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिफाई किया है। इनमें जिला शिमला के 626 मामले हैं। इसके अलावा अन्य जिलों के मामले हैं।
हालांकि विभाग की ओर से टीबी की रोकथाम के लिए कार्य किया जा रहा है। जनवरी से अगस्त के बीच 28,008 संदिग्ध मरीजों ने जांच की है। इन मरीजों की जांच में टीबी पॉजिटिव आने वाले मरीजों को उपचार देना शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से टीबी की समय पर पहचान, जांच, उपचार किया जा रहा है। वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त अभियान में साथ देने का आग्रह किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने कहा कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते जांच करवाएं और चिकित्सकों की ओर से निर्धारित उपचार का पूरा कोर्स करें।
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जनवरी से अगस्त के बीच 28,008 संदिग्ध मरीजों की स्वास्थ्य विभाग ने की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में पांच महीनों में 28 क्षय रोगियों की मौत हुई है। इसके पीछे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां कारण बनी हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौत के कारणों का खुलासा किया गया है। हालांकि, मृत्यु दर राष्ट्रीय आंकड़े के अनुसार कम है और चार फीसदी है। इसमें सबसे कम उम्र की 36 वर्षीय टीबी रोगी महिला भी है। महिला चौथी बार क्षय रोग पॉजिटिव हुई थी।
क्षय रोग के साथ किडनी की भी बीमारी थी। उपचाराधीन महिला की क्षय रोग के साथ किडनी में दिक्कत आने से मौत हो गई। वहीं, चिड़गांव खंड से एक, जुब्बल कोटखाई से एक, कुमारसैन से एक, मशोबरा से पांच, मतियाना से तीन, ननखड़ी से एक, नेरवा से एक, रामपुर से चार और शिमला शहरी क्षेत्र से 11 टीबी मरीजों की मृत्यु हुई। जिले में 1393 क्षय रोगियों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिफाई किया है। इनमें जिला शिमला के 626 मामले हैं। इसके अलावा अन्य जिलों के मामले हैं।
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हालांकि विभाग की ओर से टीबी की रोकथाम के लिए कार्य किया जा रहा है। जनवरी से अगस्त के बीच 28,008 संदिग्ध मरीजों ने जांच की है। इन मरीजों की जांच में टीबी पॉजिटिव आने वाले मरीजों को उपचार देना शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से टीबी की समय पर पहचान, जांच, उपचार किया जा रहा है। वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त अभियान में साथ देने का आग्रह किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने कहा कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते जांच करवाएं और चिकित्सकों की ओर से निर्धारित उपचार का पूरा कोर्स करें।
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