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Shimla News: केएनएच में रेफर मरीज की दो घंटे फंसी रही गाड़ी, तीमारदारों का हंगामा
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आईजीएमसी रेफर की थी महिला, गाड़ी के आगे अस्पताल कर्मी अपनी गाड़ी खड़ी कर हो गया गायब
कई फोन किए लेकिन कर्मी ने नहीं दिया जवाब, दो घंटे बाद पहुंचे आईजीएमसी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज को रेफर गायनी मरीज की गाड़ी शुक्रवार को दो घंटे तक पार्किंग में फंसी रही। स्टाफ कर्मी के गाड़ी न हटाने के कारण तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। इन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध किया। इसके बाद तीमारदार ने चिकित्सा अधीक्षक के पास आकर शिकायत दी। शिकायत के चंद मिनट बाद सुरक्षा कर्मी को तुरंत वाहन को निकालने के लिए कहा गया। इसके बाद मामला सुलझा।
सुबह 11:15 बजे कमला नेहरू अस्पताल से गायनी मरीज आईजीएमसी के लिए रेफर की गई। जैसे ही मरीज को परिवारजनों ने गाड़ी में बिठाया तो देखा कि वाहन के आगे अस्पताल के किसी स्टाफ कर्मी ने अपनी गाड़ी खड़ी की है। परिजनों ने गाड़ी में लिखे मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, लेकिन वे नहीं आया। कई बार तीमारदार ने फोन किया और बताया कि मरीज को रेफर किया है लेकिन स्टाफ कर्मी ने तीमारदारों की एक न सुनी। इसके बाद तीमारदार का गुस्सा फुटा। विरोध को देखते हुए सुरक्षा कर्मी ने भी मामला सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन स्टाफ कर्मी की मनमानी के कारण पार्किंग से परिजन वाहन न निकाल सके। वहीं, स्टाफ कर्मी ने दावा किया कि सुबह तीमारदार को फोन कर वाहन हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन परिजनाें ने वाहन नहीं हटाया। इसके बाद उन्होंने अपनी गाड़ी को पार्क कर दिया और अपने कार्य के लिए कक्ष में चले गए।
मरीज के परिजन ने बताया कि अस्पताल स्टाफ की मनमानी से काफी परेशान हुए। दो घंटे तक मरीज को गाड़ी में बिठाए रखना जान से खिलवाड़ करना है। मरीज को गायनी वार्ड से आईजीएमसी रेफर किया गया था। कई बार फोन करने पर स्टाफ कर्मी नहीं आया। इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक को जानकारी दी गई। बेतरतीब तरीके से पार्किंग में वाहन पार्क होते हैं।
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कोट...
तीमारदार जैसे ही शिकायत लेकर पहुंचा तो तुरंत सुरक्षा कर्मी को बुलाकर गाड़ी को हटवाया गया और मरीज की गाड़़ी को निकाला गया। मरीजों को किसी भी प्रकार से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
-डॉ. सुंदर नेगी, चिकित्सा अधीक्षक, कमला नेहरू अस्पताल, शिमला
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कई फोन किए लेकिन कर्मी ने नहीं दिया जवाब, दो घंटे बाद पहुंचे आईजीएमसी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज को रेफर गायनी मरीज की गाड़ी शुक्रवार को दो घंटे तक पार्किंग में फंसी रही। स्टाफ कर्मी के गाड़ी न हटाने के कारण तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा। इन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध किया। इसके बाद तीमारदार ने चिकित्सा अधीक्षक के पास आकर शिकायत दी। शिकायत के चंद मिनट बाद सुरक्षा कर्मी को तुरंत वाहन को निकालने के लिए कहा गया। इसके बाद मामला सुलझा।
सुबह 11:15 बजे कमला नेहरू अस्पताल से गायनी मरीज आईजीएमसी के लिए रेफर की गई। जैसे ही मरीज को परिवारजनों ने गाड़ी में बिठाया तो देखा कि वाहन के आगे अस्पताल के किसी स्टाफ कर्मी ने अपनी गाड़ी खड़ी की है। परिजनों ने गाड़ी में लिखे मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, लेकिन वे नहीं आया। कई बार तीमारदार ने फोन किया और बताया कि मरीज को रेफर किया है लेकिन स्टाफ कर्मी ने तीमारदारों की एक न सुनी। इसके बाद तीमारदार का गुस्सा फुटा। विरोध को देखते हुए सुरक्षा कर्मी ने भी मामला सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन स्टाफ कर्मी की मनमानी के कारण पार्किंग से परिजन वाहन न निकाल सके। वहीं, स्टाफ कर्मी ने दावा किया कि सुबह तीमारदार को फोन कर वाहन हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन परिजनाें ने वाहन नहीं हटाया। इसके बाद उन्होंने अपनी गाड़ी को पार्क कर दिया और अपने कार्य के लिए कक्ष में चले गए।
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मरीज के परिजन ने बताया कि अस्पताल स्टाफ की मनमानी से काफी परेशान हुए। दो घंटे तक मरीज को गाड़ी में बिठाए रखना जान से खिलवाड़ करना है। मरीज को गायनी वार्ड से आईजीएमसी रेफर किया गया था। कई बार फोन करने पर स्टाफ कर्मी नहीं आया। इसके बाद चिकित्सा अधीक्षक को जानकारी दी गई। बेतरतीब तरीके से पार्किंग में वाहन पार्क होते हैं।
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तीमारदार जैसे ही शिकायत लेकर पहुंचा तो तुरंत सुरक्षा कर्मी को बुलाकर गाड़ी को हटवाया गया और मरीज की गाड़़ी को निकाला गया। मरीजों को किसी भी प्रकार से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
-डॉ. सुंदर नेगी, चिकित्सा अधीक्षक, कमला नेहरू अस्पताल, शिमला