नड्डा ने मांगा सीएम से इस्तीफा, बोले- गद्दी बचाने में जुटे हैं वीरभद्र
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी गद्दी बचाने में जुटे हैं, जबकि सीएम कार्यालय भ्रष्टाचार के मामले में शंका के घेरे आ चुका है। मुख्यमंत्री अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के चल रहे मामलों में बचाव पर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।
कहा कि केंद्र सरकार के प्रदेश के विकास के लिए दी जा रही योजना में राज्य सरकार रोड़ा अटकाने का काम कर रही है। नड्डा ने कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर भी निशाना साधा। शिमला दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस की दिल्ली में लीडरशिप का भी नैतिक पतन हो गया है।
नैतिकता के आधार पर उन्हें मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगना चाहिए। कांग्रेस के कमजोर होने के चलते यह नहीं हो रहा है। प्रदेश सरकार ने विकास की गति को रोक दिया है। 61 राष्ट्रीय राजमार्गों के मसले पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बैठक बुलाई थी। बैठक में सभी सांसद और प्रदेश के लोक निर्माण विभाग सचिव नरेंद्र चौहान मौजूद थे।
एम्स के लिए पर्याप्त भूमि नहीं मिली
केंद्र ने स्पष्ट किया कि डीपीआर के लिए स्वीकृत 230 करोड़ राज्य सरकार नहीं, बल्कि एजेंसी को जाएगा, जिसने डीपीआर तैयार करनी है। राज्य से पहाड़ी क्षेत्र में कंपनियों के रुचि नहीं लेने की बात रखी गई। इसके लिए केंद्र ने नियमों में शिथिलता बरतते हुए एक से अधिक काम एक एजेंसी को देने पर सहमति जताई। बावजूद इसके राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही है।
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने को केंद्र ऊना में 300 बिस्तर वाला अस्पताल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। अस्पताल में 8 सुपर स्पेशिएलिटी विभाग और 150 डॉक्टर होंगे। यह अस्पताल पीजीआई चंडीगढ़ के अधीन रहेगा। नड्डा ने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ से प्रशिक्षित डॉक्टर ही इसमें काम करेंगे।
नड्डा ने प्रदेश में एम्स खोलने में देरी की वजह भूमि की उपलब्धता नहीं होना बताया। कहा कि जो भूमि राज्य सरकार दे रही है, वो पर्याप्त नहीं है। एम्स खोलने को केंद्र गंभीर है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह पर टिप्पणी करते हुए नड्डा बोले - यहां के मंत्री कैजुअल हो जाते हैं। वे जैसे बातें करते हैं, उस तरह से संस्थान नहीं खुलते।