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Shimla News: घंटों करना पड़ा इंतजार, फिर भी नहीं आया नंबर, बिना उपचार लौटे मरीज
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लाइव रिपोर्ट
चमियाना अस्पताल की यूरोलॉजी ओपीडी में दिनभर भटकते रहे लोग, कई मरीजों को आठ घंटे लग गए
डॉक्टर के पास 11:15 बजे पहुंचा पहला नियमित मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हफ्ते की शुरुआत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के मरीजों के लिए बेहद मुश्किल भरी रही। सोमवार सुबह यूरोलॉजी ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। इससे व्यवस्थाएं पूरी तरह लड़खड़ा गईं।
मरीजों को अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर बारी आने तक करीब 8 घंटे लग गए। इस कारण कई मरीज बिना चेकअप करवाए ही लौट गए। सुबह 8 बजे निकले मरीजों को अस्पताल पहुंचने में ही डेढ़ घंटा लग गया। भट्ठाकुफर से चमियाना तक सड़क की हालत खस्ता है। संकरी सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही। 9:30 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को पर्ची बनाने के लिए लंबी कतार में लगना पड़ा।
पंजीकरण की प्रक्रिया में ही एक घंटा लग गया। यूरोलॉजी ओपीडी में 10:30 बजे पहुंचने के बाद उन्हें यह देखकर निराशा हुई कि डॉक्टरों की संख्या सिर्फ दो है और मरीज 200 से ज्यादा हैं। ओपीडी में पहले भर्ती और इंजेक्शन लगने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी गई। इसके बाद पिछले सप्ताह से लंबित मरीजों को देखा गया। इस कारण नियमित टोकन नंबर वाला पहला मरीज डॉक्टर के पास 11:15 बजे पहुंचा।
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अस्पताल में चार तरह के टोकन जारी किए जाते हैं। इसमें नियमित, वरिष्ठ नागरिक, स्टाफ और आपातकालीन मरीजों के लिए अलग-अलग टोकन होते हैं। इसके अलावा कुछ मरीज ऐसे भी थे जिन्हें डॉक्टरों द्वारा विशेष रूप से बुलाया था। इस कारण पंक्ति का क्रम पूरी तरह बिगड़ गया। दिनभर मरीजों और सुरक्षा कर्मियों के बीच इसे लेकर बहस होती रही।
मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन पर पहचान वालों को पहले भेजने के आरोप भी लगाए। 11 से 3 बजे तक महज 17 नियमित टोकन नंबर वाले मरीजों को ही डॉक्टर के पास पहुंचने का मौका मिला। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सभी मरीजों को देखने के बाद ही वह अस्पताल से जाएंगे। अस्पताल से बस स्टैंड तक बसों के अभाव में कई मरीज सुबह से खाली पेट अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कुछ मरीज शाम को गांवों के लिए बसें न होने और कुछ ऐसे कर्मचारी थे जो आधे दिन की छुट्टी लेकर आए थे वह बिना उपचार करवाए ही लौट गए।
केस स्टडी वन :
शाम चार बजे तक नहीं आया नंबर
कुल्लू से शिमला आए अच्छर सिंह यूरोलॉजी ओपीडी के लिए सोमवार सुबह 7 बजे ही चमियाना अस्पताल पहुंच गए थे। वह आश्वस्त थे कि जल्दी पहुंचने पर जल्दी नंबर आ जाएगा और वह उसी दिन लौट सकेंगे। लेकिन पूरा दिन के इंतजार के बाद भी शाम 4 बजे तक उनका टोकन नंबर नहीं आया। दिनभर की थकावट, खाली पेट इंतजार और बार-बार सुरक्षा कर्मियों से बहस के बाद जब शाम चार बजे भी डॉक्टर के पास जाने की कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो अच्छर सिंह ने मजबूरी में आसपास रुकने की जगह ढूंढनी शुरू की। अब वह नहीं जानते कि उनका नंबर आज आएगा या अगली बार फिर से इतनी ही मशक्कत करनी पड़ेगी।
केस स्टडी दो
दूसरी बार आया हूं छुट्टी लेकर
शिमला के एक निजी कार्यालय में काम करने वाले अजीत शर्मा दूसरी बार दफ्तर से छुट्टी लेकर यूरोलॉजी ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आए थे। सोमवार को उनका टोकन नंबर 89 था लेकिन भीड़ और अव्यवस्था के कारण उन्हें बताया गया कि अगर इंतजार करना है तो शाम 5 बजे के बाद ही नंबर आएगा। अजीत के लिए यह इंतजार बेहद कठिन था क्योंकि वह बार-बार छुट्टी नहीं ले सकते। अगली बार कब मौका मिलेगा, यह भी तय नहीं है।
सड़क अभी भी खस्ताहाल
चमियाना अस्पताल तक जाने वाली भट्ठाकुफर-चमियाना सड़क अभी भी खराब हालत में है। इससे मरीजों और उनके साथ आए लोगों को काफी परेशानी होती है। यह सड़क कई जगह से टूटी हुई है, गड्ढे भरे हैं और रास्ता संकरा है। बरसात में रास्ता कीचड़ और फिसलन से और खतरनाक हो जाता है। कई बार दो गाड़ियां एक साथ नहीं निकल पातीं और जाम लग जाता है। सड़क के किनारे अवैध तरीके से गाड़ियां खड़ी रहती हैं जिससे रास्ता और तंग हो जाता है। यह वही सड़क है जिससे राज्य के एकमात्र सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक मरीजों को लाया जाता है, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं हुई है।
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चमियाना अस्पताल की यूरोलॉजी ओपीडी में दिनभर भटकते रहे लोग, कई मरीजों को आठ घंटे लग गए
डॉक्टर के पास 11:15 बजे पहुंचा पहला नियमित मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हफ्ते की शुरुआत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के मरीजों के लिए बेहद मुश्किल भरी रही। सोमवार सुबह यूरोलॉजी ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। इससे व्यवस्थाएं पूरी तरह लड़खड़ा गईं।
मरीजों को अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर बारी आने तक करीब 8 घंटे लग गए। इस कारण कई मरीज बिना चेकअप करवाए ही लौट गए। सुबह 8 बजे निकले मरीजों को अस्पताल पहुंचने में ही डेढ़ घंटा लग गया। भट्ठाकुफर से चमियाना तक सड़क की हालत खस्ता है। संकरी सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही। 9:30 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को पर्ची बनाने के लिए लंबी कतार में लगना पड़ा।
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पंजीकरण की प्रक्रिया में ही एक घंटा लग गया। यूरोलॉजी ओपीडी में 10:30 बजे पहुंचने के बाद उन्हें यह देखकर निराशा हुई कि डॉक्टरों की संख्या सिर्फ दो है और मरीज 200 से ज्यादा हैं। ओपीडी में पहले भर्ती और इंजेक्शन लगने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी गई। इसके बाद पिछले सप्ताह से लंबित मरीजों को देखा गया। इस कारण नियमित टोकन नंबर वाला पहला मरीज डॉक्टर के पास 11:15 बजे पहुंचा।
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अस्पताल में चार तरह के टोकन जारी किए जाते हैं। इसमें नियमित, वरिष्ठ नागरिक, स्टाफ और आपातकालीन मरीजों के लिए अलग-अलग टोकन होते हैं। इसके अलावा कुछ मरीज ऐसे भी थे जिन्हें डॉक्टरों द्वारा विशेष रूप से बुलाया था। इस कारण पंक्ति का क्रम पूरी तरह बिगड़ गया। दिनभर मरीजों और सुरक्षा कर्मियों के बीच इसे लेकर बहस होती रही।
मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन पर पहचान वालों को पहले भेजने के आरोप भी लगाए। 11 से 3 बजे तक महज 17 नियमित टोकन नंबर वाले मरीजों को ही डॉक्टर के पास पहुंचने का मौका मिला। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सभी मरीजों को देखने के बाद ही वह अस्पताल से जाएंगे। अस्पताल से बस स्टैंड तक बसों के अभाव में कई मरीज सुबह से खाली पेट अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कुछ मरीज शाम को गांवों के लिए बसें न होने और कुछ ऐसे कर्मचारी थे जो आधे दिन की छुट्टी लेकर आए थे वह बिना उपचार करवाए ही लौट गए।
केस स्टडी वन :
शाम चार बजे तक नहीं आया नंबर
कुल्लू से शिमला आए अच्छर सिंह यूरोलॉजी ओपीडी के लिए सोमवार सुबह 7 बजे ही चमियाना अस्पताल पहुंच गए थे। वह आश्वस्त थे कि जल्दी पहुंचने पर जल्दी नंबर आ जाएगा और वह उसी दिन लौट सकेंगे। लेकिन पूरा दिन के इंतजार के बाद भी शाम 4 बजे तक उनका टोकन नंबर नहीं आया। दिनभर की थकावट, खाली पेट इंतजार और बार-बार सुरक्षा कर्मियों से बहस के बाद जब शाम चार बजे भी डॉक्टर के पास जाने की कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो अच्छर सिंह ने मजबूरी में आसपास रुकने की जगह ढूंढनी शुरू की। अब वह नहीं जानते कि उनका नंबर आज आएगा या अगली बार फिर से इतनी ही मशक्कत करनी पड़ेगी।
केस स्टडी दो
दूसरी बार आया हूं छुट्टी लेकर
शिमला के एक निजी कार्यालय में काम करने वाले अजीत शर्मा दूसरी बार दफ्तर से छुट्टी लेकर यूरोलॉजी ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आए थे। सोमवार को उनका टोकन नंबर 89 था लेकिन भीड़ और अव्यवस्था के कारण उन्हें बताया गया कि अगर इंतजार करना है तो शाम 5 बजे के बाद ही नंबर आएगा। अजीत के लिए यह इंतजार बेहद कठिन था क्योंकि वह बार-बार छुट्टी नहीं ले सकते। अगली बार कब मौका मिलेगा, यह भी तय नहीं है।
सड़क अभी भी खस्ताहाल
चमियाना अस्पताल तक जाने वाली भट्ठाकुफर-चमियाना सड़क अभी भी खराब हालत में है। इससे मरीजों और उनके साथ आए लोगों को काफी परेशानी होती है। यह सड़क कई जगह से टूटी हुई है, गड्ढे भरे हैं और रास्ता संकरा है। बरसात में रास्ता कीचड़ और फिसलन से और खतरनाक हो जाता है। कई बार दो गाड़ियां एक साथ नहीं निकल पातीं और जाम लग जाता है। सड़क के किनारे अवैध तरीके से गाड़ियां खड़ी रहती हैं जिससे रास्ता और तंग हो जाता है। यह वही सड़क है जिससे राज्य के एकमात्र सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक मरीजों को लाया जाता है, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं हुई है।