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Shimla News: हिमाचल में बने देसी घी के गुजराती हुए कायल

Tue, 28 Jan 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2025 11:59 PM IST
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Gujaratis are impressed by the desi ghee made in Himachal.
स्वयं सहायता समूहों को ऑनलाइन मिल रहे हैं घी के ऑर्डर, तीन माह में बेचा 80 हजार रुपये का घी
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हिमईरा वेबसाइट से बेचे जा रहे हैं समूहों के उत्पाद
भारती शर्मा
शिमला। हिमाचल के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की मांग हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों में बढ़ना शुरू हो गई है। पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र तक स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाया देसी घी बेचा जा रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से शुरू की गई हिमईरा ई-कॉमर्स वेबसाइट पर गाय के देसी घी की मांग सबसे अधिक आ रही है। बीते तीन माह में हिम ईरा वेबसाइट में अब तक 225 ऑर्डर पूरे किए जा चुके हैं। इसमें 80 हजार रुपये की बिक्री हो चुकी है। विभाग के अनुसार इसमें करीब 50 फीसदी देसी घी की बिक्री हुई है तथा 90 फीसदी ऑर्डर बाहरी राज्यों से आए हैं। वेबसाइट पर घी 1200 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिक रहा है। सर्दियां होने से घी की मांग ज्यादा है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से बनाई इस वेबसाइट प्रदेश के 44 हजार स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) जुड़े हैं तथा इसमें 3,50,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं काम कर रही हैं। इसमें सही पाए जाने वाले उत्पादों की पैकिंग करके उन्हें वेबसाइट पर बेचने के लिए चढ़ा दिया जाता है।
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ऑर्डर आने के बाद उत्पादों की होम डिलिवरी की जाती है। समूहों से उत्पाद खरीदने के बाद उनकी विभाग की ओर से पेमेंट उसी समय कर दी जाती है। ठियोग ब्लॉक के हिम्मत समता स्वयं सहायता चटोग की सचिव अमिता शर्मा ने बताया कि वह दो सालों से हिमईरा की दुकानाें पर अपने उत्पाद बेच रहे हैं। लेकिन वहां से ज्यादातर खरीददारी स्थानीय लोग ही करते थे। तीन जनवरी को हिमईरा की वेबसाइट लांच होने के बाद उनके समूह के पास दोगुना ऑर्डर आना शुरू हो गए हैं। अब प्रदेश सहित देशभर में उनके उत्पाद पहुंचना शुरू हो गए हैं। इससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है। अमिता ने बताया कि उनके समूह में करीब एक हजार महिलाएं जुड़ी हैं।
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कोट
वेबसाइट पर समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे देसी घी की मांग अधिक है। हिमाचल के मुकाबले बाहरी राज्यों से ज्यादा ऑर्डर आ रहे हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उनके आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
-कल्यानी गुप्ता, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी, ग्रामीण विकास विभाग
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