{"_id":"5958b4104f1c1b854d8b49b7","slug":"gst-in-himachal-buyers-and-sellers-both-faces-problems","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी के जंजाल में उलझे कारोबारी, पुराने रेट पर ही खरीद फरोख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएसटी के जंजाल में उलझे कारोबारी, पुराने रेट पर ही खरीद फरोख्त
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 02 Jul 2017 03:35 PM IST
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जीएसटी प्रभावी होने के बाद प्रदेश के कारोबारी और आम लोग पसोपेश में हैं। खरीदार यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें नई दरों में सामान मिल रहा है या व्यापारी उन्हें पुरानी दरों पर ही सामान बेचकर चूना लगा रहे हैं। जीएसटी से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए आम जनता को पहले दिन राहत मिलने का कोई आभास नहीं हुआ।
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कुल मिलाकर शनिवार को हर वर्ग जीएसटी के जंजाल में फंसा हुआ नजर आया। कारोबारी जीएसटी के तहत न तो अपना पंजीकरण करवा पाए और न ही उन्हें नई बिल बुक मिल पाईं। स्थानीय कारोबारी जीएसटी के लिए तैयार नहीं है। व्यापारियों ने इस आशय को पुष्ट करते हुए बताया कि विभाग से उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है।
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उधर, संशय की स्थिति को दूर करने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग ने प्रदेश भर में जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन शुरू कर दिया है, लेकिन कारोबारियों में जीएसटी का खौफ है। तंग आकर कई कारोबारियों ने दुकानों के शटर डाउन कर दिए तो कइयों ने ग्राहकों को बिना सामान दिए ही लौटा दिया।
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प्रदेश के कई शहरों में पुराने ढर्रे पर ही समान की खरीद फरोख्त होती रही। दूसरी तरफ खरीददारों के बीच जीएसटी को लेकर उत्सुकता रही। लेकिन दाम घटने की उम्मीद लेकर दुकानों में पहुंचे ग्राहकों को मायूस होना पड़ा। उन्हें सामान को पुरानी दरों पर ही खरीदना पड़ा। प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद के हालात देखकर असमंजस के बरकरार रहने के ही आसार हैं।
जिला शिमला
व्यापारियों के लिए आफत
जीएसटी शिमला के कारोबारियों के लिए आफत बन गया है। कारोबारी जीएसटी के प्रावधानों से अनजान हैं। शिमला के कच्ची घाटी में आबकारी एवं कराधान विभाग ने सेमीनार आयोजित किया। व्यापार मंडल शिमला के अध्यक्ष इंद्रजीत ने कहा कि अबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों से शिमला में इस तरह के सेमीनार आयोजित करने की मांग की गई है।
जिला ऊना
असमंजस में ऊना के कारोबारी
जीएसटी लागू होने से ऊना के व्यापारी असमंजस में हैं। व्यापारी वर्ग को जीएसटी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। बड़े व्यापारियों की मानें तो देश-विदेश की नामी कंपनियां जीएसटी के चलते उनको स्टॉक नहीं दे रही हैं। कंपनियां स्टॉक भेजने में सॉफ्टवेयर अपडेट होने का बहाना बना रही है।
जिला सिरमौर
नाहन शहर में बंद रहीं दुकानें
जीएसटी लागू के बाद नाहन शहर में शनिवार को कई दुकानें बंद रहीं। जीएसटी की जानकारी न होने से बिल वाऊचर को लेकर परेशानी झेलनी पड़ रही है। दुकानों में सामान खरीदने पहुंचे लोगाें को बिलिंग संबंधी जानकारी के अभाव में बिना सामान लिए लौटना पड़ा। मोबाइल, टीवी और अन्य वस्तुओं के व्यापारी बिलिंग में उलझे रहे।
जिला कांगड़ा
बाजारों में छाई मंदी
जीएसटी को लेकर कांगड़ा जिले के कारोबारी भी परेशान हैं। शनिवार को प्रमुख बाजारों में मंदी रही। व्यापारियों ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन नहीं किया। सेंट्रल एक्साइज टैक्स के दायरे में आने वाले कारोबारियों को प्रोवीजनल जीएसटी नंबर ही मिले हैं। व्यापार मंडल कोतवाली बाजार के प्रधान अजिंद्र चकवाल ने कहा कि अधिकतर व्यापारी जीएसटी से अनजान हैं और वे पुराने तरीके से ही सामान का बिल काट रहे हैं।
जिला बिलासपुर
परेशान हुए कारोबारी
जीएसटी लागू होने के बाद पहले दिन कारोबारियों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। कई कारोबारियों ने जीएसटी नंबर के लिए आवेदन तो किया लेकिन नंबर नहीं मिला। वहीं पुराने सामान को पहले वाले रेट पर ही बेचा जा रहा है। दुकानदारों की नई बिल बुक नहीं छपी है।
जिला हमीरपुर
अपडेट नहीं हुए सिस्टम
जीएसटी को लेकर जिला हमीरपुर में कोई तैयारी नहीं है। कारोबारियों के सिस्टम अपडेट नहीं हो पाए हैं। जीएसटी को लेकर असमंजस है। शहरों और कस्बों में पुराने दामों पर ही खाद्य वस्तुएं और अन्य सामान बेचा गया। अधिकांश कारोबारी जीएसटी लागू होने से खुश नहीं हैं जबकि उपभोक्ता जीएसटी का समर्थन कर रहे हैं।
जीएसटी-इनपुट
अपडेट नहीं व्यापारी
जीएसटी को लेकर चंबा का व्यापारी वर्ग पूरी तरह से अपडेट नहीं हो पाया है। ज्यादातर व्यापारियों को अभी तक इस बारे पूरी जानकारी हासिल नहीं मिल पाई है। चंबा व्यापार मंडल ने जागरूकता शिविर आयोजित करने की मांग की है। जीएसटी लागू होने के बाद आम लोगों से लेकर दुकानदार जानकारी न होने की बात कर रहे हैं। बाजार में कारोबार जीएसटी से पूर्व की व्यवस्था से ही चल रहा है।
जीएसटी ने सेब बागवानों को राहत और झटका दोनों ही दिए
जीएसटी लागू होने के बाद सेब बागवानों को राहत और झटका दोनों ही लगे हैं। जहां खादों के रेट घट सकते हैं तो कीटनाशकों और कृषि उपकरणों के दाम बढ़ सकते हैं। प्रदेश के छह लाख से अधिक परिवार सेब बागवानी से जुडे़ हैं। जीएसटी के प्रारंभिक प्रारूप में खादों पर छह फीसदी तक टैक्स लगाए जाने का प्रावधान था।
इसमें एक फीसदी आबकारी कर था तो पांच फीसदी तक वैट था। इसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की योजना थी। अब पांच प्रतिशत जीएसटी ही देय होगा। इससे अब खादें महंगे होने की बजाय सस्ती भी हो सकती हैं। खादों पर जीएसटी पांच फीसदी ही रखने का फैसला लागू होने से थोड़ा वक्त पहले ही ले लिया गया था।
दूसरी ओर, कीटनाशकों और फफूंदनाशकों पर 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगेगा। इससे कीटनाशक और फफूंदनाशक महंगे होंगे। फसल सुरक्षा उत्पादों पर भी 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। प्रदेश में सेब का करीब 3000 करोड़ का सालाना कारोबार है। सेब पर कीटनाशकों और फफूंदनाशकोें का भी जमकर उपयोग होता रहा है।
कांगड़ा चाय पर लगेगा पांच फीसदी जीएसटी
प्रदेश में उगाई जाने वाली कांगड़ा चाय पर भी पांच फीसदी जीएसटी लगेगा। अब तक चाय पर लगने वाले तमाम तरह के कर चार से पांच फीसदी तक ही थे। इससे में चाय बागानों को चलाने वाले बागवानों को खास राहत नहीं दी गई है। हिमाचल की कांगड़ा चाय दुनिया भी में मशहूर है। इसके रेट घटने की बजाय बढ़ ही सकते हैं।
एक महीने तक पुराने दाम पर बिकेगी कुल्लवी शॉल
विश्व में मशहूर कुल्लू की शॉल भी जीएसटी के दायरे में रखी गई है। इसे किस स्लैब में रखा है, इसकी पूरी जानकारी न होने से भुट्टिको प्रबंधन असमंजस में है। ऐसे में कुल्लू शॉल समेत सभी उत्पाद एक माह तक पुराने रेट पर बेचे जाएंगे। शुक्रवार आधी रात से लागू जीएसटी को देखते हुए भुट्टिको प्रबंधन ने अपने सभी सेल केंद्रों को पुराने भाव से ही कुल्लवी शॉल, टोपी तथा मफलर सहित सभी रेडिमेड उत्पादों को बेचने के आदेश जारी किए हैं।
एक माह बाद जीएसटी की रिटर्न फाइल होने के बाद पता चलेगा कि भुट्टिको के किस उत्पाद पर कितना टैक्स लगा है। इसलिए अगस्त से कुल्लवी शॉल और अन्य उत्पादों के दाम में बदलाव होने की संभावना है। भुट्टिको के मुख्य महा प्रबंधक रमेश ठाकुर ने कहा कि जीएसटी की पूरी जानकारी न होने से उन्होंने अपने उत्पादों को एक माह तक पुराने दाम पर बेचने का निर्णय लिया है।
जुलाई की टैक्स भरने के बाद पता चलेगा कि उनके किस उत्पाद पर कितना टैक्स लगा है। उन्हें अभी तक एक हजार रुपये से नीचे वाली शॉल पर पांच प्रतिशत, इससे ऊपर दाम वाली शॉल पर 12 प्रतिशत और रेडिमेड कपड़ों पर 18 फीसदी तक टैक्स की सूचना है। वे अभी भुट्टिको के कार्यक्रम को लेकर गुजरात में हैं। कुल्लू पहुंचने पर जीएसटी को और समझने की कोशिश करेंगे।
रेडिमेड वस्त्र तैयार करती है भुट्टिको
दुनिया भर में विख्यात कुल्लवी शॉल को तैयार करने वाली भुट्टिको शॉल के अलावा, टोपी, मफलर, पट्टू, कोट तथा जैकेट सहित कई अन्य रेडिमेड वस्त्रों के उत्पाद तैयार करती है। हाल ही में अमेरिका दौरे पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी को भी कुल्लू शॉल भेंट की थी।
बद्दी में पहला बिल काट कर जीएसटी का स्वागत
शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे जीएसटी लागू होते ही बद्दी के एक दवा उद्यमी ने 12 बजकर दो मिनट पर पहला बिल काटकर सामान से लदा ट्रक भेजने का दावा किया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वस्तु एवं सेवा कर की शुरुआत कर रहे थे तो बद्दी में इसका बेसब्री से इंतजार हो रहा था।
प्रदेश दवा निर्माता संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सैमसन लेबोरेटरी उद्योग बरोटवाली के निदेशक हरीश गोयल ने जीएसटी का पहला बिल 12 बजकर दो मिनट पर काटा। इस समय सैमसन उद्योग के कामगारों और कर्मचारियों की टीम प्रोडक्शन और डिस्पैच में जुटी थी।
हरीश गोयल ने भारत में एक समान टैक्स दर लागू होने पर खुशी जताई है। कहा कि अब उद्योगों को जगह-जगह टैक्स देने से राहत मिलेगी। प्रदेश दवा निर्माता उद्योग संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, लघु उद्योग भारती के प्रदेश महामंत्री राजीव
कंसल, ल्यूब फार्मा विंग के प्रांतीय चेयरमैन सतीश सिंगला ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री से मांग की है कि कि उद्यमी हरीश गोयल ने प्रेरणादायक कदम उठाया है। इस पर उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए। वे हरीश गोयल को सम्मानित करने के लिए एक अनुशंसा पत्र शीघ्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेतली को भेजेंगे।
औद्योगिक संघों ने किया जीएसटी का स्वागत
प्रदेश के उद्योग संगठनों सीआईआई, बीबीएनआईए, लघु उद्योग भारती, गत्ता उद्योग संघ और दवा निर्माता उद्योग संघ ने जीएसटी को टैक्स सुधार क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम करार देकर उसका स्वागत किया है।