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जीएसटी से हिमाचल को करोड़ों का नुकसान
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 16 Sep 2014 01:37 AM IST
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने से हिमाचल प्रदेश को सालाना तकरीबन 1500 करोड़ रुपये क्षति होने का अनुमान है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाएगी, जिसकी भरपाई करना प्रदेश सरकार के लिए संभव नहीं होगा।
इस सिलसिले में हिमाचल ने केंद्र से क्षतिपूर्ति के लिए उचित अनुदान और मुआवजे की मांग की है, जिससे राज्य को वित्तीय तौर पर नुकसान न होने पाए। प्रदेश के आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा गया है।
पिछले सप्ताह दिल्ली में जीएसटी के मुद्दे पर देश के सभी राज्यों से मंत्रियों और अफसरों को बुलाया गया था। इस दौरान प्रत्येक राज्यों की ओर से अपना पक्ष रखा गया।
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हिमाचल प्रदेश की ओर से बताया गया कि जीएसटी लागू होने की स्थिति में राज्य को लगभग 1500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। जीएसटी लागू होने से कई अतिरिक्त टैक्स का विलय हो जाएगा, जिससे प्रदेश को सबसे अधिक 640 करोड़ का घाटा होगा।
इसके अलावा सीएसटी के समाप्त होने से प्रदेश को सालाना 420 करोड़ का फटका लगेगा। पेट्रोलियम उत्पादों पर 100 करोड़ का घाटा प्रदेश को सहन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इसी से राज्य को तंबाकू उत्पादों, आईटीसी की चेन की वजह से उत्पादन का अंतिम विक्रय मूल्य घटेगा, जिससे टैक्स की क्षति होगी।
आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने बताया कि जीएसटी लागू होने से हिमाचल को भारी क्षति होने जा रही है। इस तथ्य से हिमाचल ने केंद्र को अवगत करा दिया है। साथ ही प्रदेश ने इसकी प्रतिपूर्ति के लिए अनुदान और मुआवजे की केंद्र सरकार से मांग की है।
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इस सिलसिले में हिमाचल ने केंद्र से क्षतिपूर्ति के लिए उचित अनुदान और मुआवजे की मांग की है, जिससे राज्य को वित्तीय तौर पर नुकसान न होने पाए। प्रदेश के आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखा गया है।
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पिछले सप्ताह दिल्ली में जीएसटी के मुद्दे पर देश के सभी राज्यों से मंत्रियों और अफसरों को बुलाया गया था। इस दौरान प्रत्येक राज्यों की ओर से अपना पक्ष रखा गया।
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हिमाचल प्रदेश की ओर से बताया गया कि जीएसटी लागू होने की स्थिति में राज्य को लगभग 1500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। जीएसटी लागू होने से कई अतिरिक्त टैक्स का विलय हो जाएगा, जिससे प्रदेश को सबसे अधिक 640 करोड़ का घाटा होगा।
इसके अलावा सीएसटी के समाप्त होने से प्रदेश को सालाना 420 करोड़ का फटका लगेगा। पेट्रोलियम उत्पादों पर 100 करोड़ का घाटा प्रदेश को सहन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इसी से राज्य को तंबाकू उत्पादों, आईटीसी की चेन की वजह से उत्पादन का अंतिम विक्रय मूल्य घटेगा, जिससे टैक्स की क्षति होगी।
आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने बताया कि जीएसटी लागू होने से हिमाचल को भारी क्षति होने जा रही है। इस तथ्य से हिमाचल ने केंद्र को अवगत करा दिया है। साथ ही प्रदेश ने इसकी प्रतिपूर्ति के लिए अनुदान और मुआवजे की केंद्र सरकार से मांग की है।