{"_id":"5de13a268ebc3e54ed5f08ca","slug":"govtasked-for-opinion-from-cs-and-dgp-in-gudiya-case-shimla-cm-jairam","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुड़िया मामले पर सीएम जयराम ने कही बड़ी बात, परिजनों की मांग पर लिया ये फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुड़िया मामले पर सीएम जयराम ने कही बड़ी बात, परिजनों की मांग पर लिया ये फैसला
Fri, 29 Nov 2019 09:03 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 29 Nov 2019 09:03 PM IST
विज्ञापन
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बड़ी बात कही है। पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनसे मुलाकात के दौरान गुड़िया के परिजनों ने सामने आए साक्ष्य पर असंतोष जताया है। चूंकि, मामला अति संवेदनशील है और न्यायालय के विचाराधीन है।
विज्ञापन
ऐसे में परिजनों की मांग पर मुख्य सचिव और डीजीपी से विधिक राय मांगी गई है। कहा कि कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही इस मामले में कोई फैसला लिया जाएगा। बता दें, वीरवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुड़िया के परिजनों ने मुलाकात कर सीबीआई जांच पर सवाल उठाए थे। परिजनों का कहना था कि अकेला चिरानी ही गुड़िया का हत्यारा नहीं है, उसे हत्यारों ने प्लांट किया है।
विज्ञापन
वह गुड़िया का शव ठिकाने लगाने में इस्तेमाल किया गया है। आगे कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के फेसबुक अकाउंट पर पहले कुछ फोटो डाले गए। यही मामले के आरोपी बताए गए, लेकिन वायरल होते ही इन्हें हटा दिया गया। सीबीआई इनके बारे में खामोश क्यों रही। इस बारे में स्थिति साफ की जानी चाहिए थी, मगर ऐसा नहीं किया गया। इससे सवाल खड़े होते हैं।
विज्ञापन
गांधीनगर फोरेंसिक विशेषज्ञों के चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में दिए बयान हवाला देते हुए कहा कि अब तो साफ ही हो गया है कि गुड़िया के हत्यारे एक से ज्यादा है। इसमें उन्होंने लिखा कि सरकार ने गुड़िया के नाम से सुरक्षा ऐप भी बनाई है, यह अच्छा प्रयास है। मगर इस मामले की निष्पक्ष छानबीन किसी आसीन या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली निष्पक्ष कमेटी से करवाई जाए। अब सरकार इस मामले पर ठोस कदम उठाने पर विचार कर रही है।