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सुबह चार बजे शुरू होता है यहां सरकारी स्कूल

Mon, 18 Jan 2016 02:45 PM IST
Updated Mon, 18 Jan 2016 02:45 PM IST
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Govt school in tribal district lahaul spiti of himachal pradesh.

जहां कई शिक्षक घर के पास नौकरी के लिए ट्रांसफर के जुगाड़ में रहते हैं और कई स्कूल से नदारद पाए जाते हैं, वहीं हिमाचल के जन जातीय जिला लाहौल-स्पीति में एक शिक्षक गुरु-शिष्य परंपरा की एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। माइनस डिग्री तापमान में उदयपुर उपमंडल का सलग्रां हाई स्कूल सुबह चार बजे शुरू होता है और रात दस बजे तक चलता है। बच्चों के भविष्य के लिए इस सरकारी स्कूल को मुख्याध्यापक शिवलाल अपने दम पर दिन-रात चला रहे हैं।

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ऐसा करने के लिए कोई सरकारी आदेश नहीं है, लेकिन जनजातीय क्षेत्र के बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए शिवलाल रात को भी बच्चों के साथ स्कूल में रहते हैं। बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था भी वह खुद ही करते हैं। गुरुजी की क्लास संडे को भी लगती है और वे स्वयं भी कोई छुट्टी नहीं करते हैं। शिक्षक शिव लाल के इस समर्पण को देख शिक्षा विभाग अब इन्हें पुरस्कार से सम्मानित करने की सिफारिश कर रहा है।

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घर नहीं जाते हैं मुख्याध्यापक शिव लाल

Govt school in tribal district lahaul spiti of himachal pradesh.

छह माह तक माइनस डिग्री तापमान में रहने वाली लाहौल घाटी के सलग्रां हाई स्कूल में बतौर मुख्याध्यापक तैनात शिव लाल (50) मात्र तीस किलोमीटर दूर घर होने के बावजूद दो-तीन महीनों तक घर नहीं जाते हैं। वर्ष 1988 से अध्यापन से जुड़े शिवलाल अपनी जेब से चिमरेट स्कूल का ग्राउंड भी बनवा चुके हैं।

सलग्रां के पूर्व उपप्रधान सीताराम केसरी बताते हैं कि मुख्याध्यापक शिवलाल ने बच्चों के खाने-पीने और सोने तक की व्यवस्था स्कूल में ही कर रखी है। शाम को पांच बजे स्कूल की छुट्टी के बाद सात बजे फिर से स्कूल आरंभ हो जाता है, जो रात के दस बजे तक चलता है। वे बच्चों को पढ़ाई, खेल के अलावा कई अच्छी आदतें भी सिखा रहे हैं।

छठी के बच्चों को गिनती तक नहीं आती थी

Govt school in tribal district lahaul spiti of himachal pradesh.

चिमरेट निवासी शिवलाल के अनुसार जब उन्होंने 2014 में स्कूल ज्वाइन किया तो छठी कक्षा के बच्चों को सही से सौ तक गिनती और गुना-भाग भी नहीं आता था। उनका एक ही मकसद है कि घाटी के बच्चे आईएएस, एचएएस या अफसर लाइन में सबसे आगे रहें। स्कूल का परिणाम बेहतर आए इसी लिए वे दिन रात एक कर रहे हैं।

एक माह से नहीं हुआ संपर्क-
शिवलाल की पत्नी छेतन डोलमा ने बताया कि जिस स्कूल में उनके पति पढ़ाते हैं वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है। बीते एक माह से उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है। 85 साल के बुजुर्ग माता-पिता होने के बावजूद वे घर आने के बजाय स्कूल में ही रहकर बच्चों को पढ़ाते हैं। उनके सेवा भाव की पूरा परिवार प्रशंसा करता है। शिवलाल की दो बेटियां हैं।

शिक्षा उप निदेशक लाहौल स्पीति प्रेमनाथ परशीरा ने कहा कि हेडमास्टर शिवलाल का कार्य सराहनीय है। उनके शिक्षा के प्रति समर्पण कार्य के लिए प्रदेश सरकार से अवार्ड की सिफारिश की जाएगी। इससे पहले भी वे शिक्षा और खेलों के लिए सराहनीय कार्य कर चुके हैं।

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