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Himachal: वाहनों के लिए वीआईपी नंबर खरीदने पर स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई सरकार

Tue, 13 Dec 2022 12:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 13 Dec 2022 12:00 AM IST
सार

 प्रदेश सरकार वीआईपी कल्चर पर हाईकोर्ट के  समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई। इस बारे शपथपत्र दायर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से दो हफ्ते के अतिरिक्त समय की मांग की गई।

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Govt could not clarify the situation on purchasing VIP numbers for vehicles in himachal high court
हिमाचल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार वीआईपी कल्चर पर हाईकोर्ट के  समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई। इस बारे शपथपत्र दायर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से दो हफ्ते के अतिरिक्त समय की मांग की गई। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के बाद निर्धारित की है। अदालत ने सरकारी गाड़ियों में वीआईपी नंबर लगाने पर मुख्य सचिव से जवाब तलब किया था। अदालत ने पूछा था कि आम लोगों के टैक्स के पैसों से नंबर खरीदने का क्या औचित्य है और ऐसा कौन सा पुण्य का कार्य है जो इसके बिना नहीं हो सकता। अदालत ने सरकार से यह स्पष्टीकरण मांगा था कि 0001 से 0009 तक के नंबरों के बारे में इतना खास क्या है कि इसके बिना सरकार का वाहन नहीं चल सकता। यदि इन नंबरों को सरकार के लिए ही आरक्षित रखने के पीछे सरकारी खजाने को समृद्ध करने की मंशा है तो उस स्थिति में सरकार का निर्णय उचित नहीं है।

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अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया था कि  सरकार टैक्स के पैसों से सरकारी वाहनों में पसंदीदा नंबर नहीं लगा सकती है। बता दें कि याचिकाकर्ता संजय सूद ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की ओर से 26 दिसंबर 2011 को जारी अधिसूचना के आधार पर उसने 50 हजार रुपये की राशि से 0006 नंबर बुक करवाया था। विभाग ने मनमाने तरीके से इसका आवंटन कर दिया। 18 नवंबर 2015 को राज्य सरकार ने अधिसूचना के तहत 0001 से 0009 तक के सभी नंबर सरकारी वाहनों के लिए आरक्षित रखे हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि जब उसने 50 हजार रुपये की राशि से 0006 नंबर बुक करवाया था तो उस स्थिति में इस नंबर को किसी और को आवंटन किया जाना न्यायोचित नहीं है। वीआईपी नंबर के लिए वर्ष 2015 से पहले 50 हजार रुपये का मूल्य रखा गया था। आम जनता भी पैसे जमा करवाने के बाद अपना पसंदीदा नंबर खरीद सकती थी, लेकिन 2015 के बाद 0001 से 0009 तक के सभी नंबर सरकारी वाहनों के लिए आरक्षित रखे हैं।

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