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डाक्टर-इंजीनियर बनना लेकिन इंसानियत मत भूलना: राज्यपाल

Sat, 06 Jul 2019 08:07 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 06 Jul 2019 08:07 PM IST
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governor Acharya Devvrat statement in amar ujala medhavi chhatra samman samaroh 2019 at shimla
- फोटो : अमर उजाला

अगर डाक्टर के अंदर इंसानियत न हो तो वह हैवान बन जाता है और अगर इंजीनियर में इंसानियत न हो तो मौत का कारण बन जाता है। इसलिए बच्चों डाक्टर, इंजीनियर जरूर बनना लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि इंसान बने रहना।

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यह बात अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बच्चों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत संस्कृत से की। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में ‘असतो मा सद्गमय...’ श्लोक पढ़ा। 
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि वह 35 साल से शिक्षक के तौर पर छात्र-छात्राओं के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि अठवीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की आयु किशारावस्था मानी जाती है और इस अवस्था में शरीर में परिवर्तन व हार्मोंस में बदलाव तेज होता है।
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इस अवधि में किशोर भावना में ज्यादा होता है। इसलिए वह दिमाग की बजाय दिल से ज्यादा निर्णय लेता है। इस उम्र में दिल से लिया गया निर्णय घातक होता है जबकि दिमाग से लिया फैसला सही दिशा देता है।

सही दिशा का ज्ञान अध्यापक और माता-पिता देते हैं। माता-पिता से बढ़कर हितकारी कोई नहीं हो सकता। माता-पिता हर समय अपने बच्चे के हित के बारे में सोचते रहते हैं।

आचार्य देवव्रत ने कहा कि माता-पिता से कभी गलती मत छुपाओ क्योंकि अगर ऐसा किया तो भटक जाएंगे। मनाली में महर्षि मनु पैदा हुए थे और उन्होंने कहा था कि माता पिता और गुरु का हमेशा सम्मान करना चाहिए।

अमर उजाला के प्रयासों को सराहा

governor Acharya Devvrat statement in amar ujala medhavi chhatra samman samaroh 2019 at shimla

राज्यपाल ने हर साल होने वाले इस कार्यक्रम को सफल रूप से करने के लिए अमर उजाला को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लगभग सभी जिलों के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर अमर उजाला मेधावियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्हें अन्य के लिए मिसाल के तौर पर पेश करता है। इससे बच्चों में और अच्छा करने की इच्छा जागृत होती है और प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा इस प्रकार के कार्यक्रम से मिलती है।

पुरस्कृत हो रहे मेधावियों में 80 फीसदी छात्राओं की संख्या पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि अमर उजाला लगातार इस तरह के प्रयास करता रहा है। उन्होंने कहा कि अपराजिता अभियान के जरिये भी अमर उजाला ने महिला सशक्तिकरण के लिए सार्थक प्रयास किया है।

राज्यपाल ने यह दी सीख 
लक्ष्य निर्धारित करें, सफलता मिलेगी। 
मस्तिष्क से ज्यादा दिल से काम लेना इस उम्र में रहता है नुकसानदायक। 
माता-पिता से कभी किसी तरह की गलती को न छुपाना। 
माता-पिता से बढ़कर हितकारी कोई नहीं हो सकता। 
माता पिता और गुरु का हमेशा सम्मान करें।

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