एचपीयू की रैंकिंग गिरी, 50 पायदान नीचे खिसकी, राज्यपाल ने दिया नोटिस
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की रैंकिंग पचास पायदान गिरने पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने तल्खी दिखाई है। 121वें से 171वें रैंक पर पहुंचने पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को कारण बताओ नोटिस जारी कर पिछड़ने के कारण पूछे हैं। राज्य और केंद्र सरकार से करोड़ों रुपये का बजट मिलने के बावजूद विवि की साख गिरने पर राज्यपाल ने नाराजगी जताते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को सुधार लाने के निर्देश भी दिए हैं।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट आफ रैंकिंग फ्रेमवर्क ने बीते अप्रैल महीने में देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की रैंकिंग जारी की है। इसमें प्रदेश का सबसे बड़ा और लाखों छात्रों को शिक्षा प्रदान करने वाला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय देश के श्रेष्ठ सौ विश्वविद्यालयों की सूची में आना तो दूर पुरानी रैंकिंग से भी 50 पायदान नीचे खिसक गया है।
बीते साल देश भर के विश्वविद्यालयों में 121वां रैंक प्राप्त करने वाला हिमाचल विश्वविद्यालय इस बार 171वें रैंक पर पहुंच गया है। साल 2016 में हिमाचल विश्वविद्यालय को यूजीसी की संस्था नैक से ए ग्रेड मिला था, इसके चलते विश्वविद्यालय समुदाय को इस बार रैंकिंग में सुधार आने की उम्मीद थी। लेकिन सुधार होना तो दूर रैंकिंग घटने से प्रदेश की साख को बड़ा धक्का लगा है।
सर्वे में ज्यादा विवि शामिल होने से गिरी रैंकिंग: चौहान
एचपीयू के कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने बताया कि एनआईआरएफ के इस बार के सर्वे में शामिल होने वाले विश्वविद्यालयों की संख्या अधिक रहना भी रैंक के गिरने की वजह रही है। पहले बहुत कम विश्वविद्यालय इसमें हुआ करते थे।
प्रदेश की विपरीत भौगोलिक परिस्थितियां, संबद्ध सैकड़ों कॉलेज व शिक्षण संस्थान, शिक्षक छात्र अनुपात का अंतर अधिक होना, विश्वविद्यालय में सीनियर प्रोफेसर की लगातार हो रही सेवानिवृत्तियाें के कारण विभाग खाली हो गए हैं।
नई नियुक्तियां नहीं हो पाईं, जिससे शोध और शिक्षण दोनों कार्य प्रभावित हुए हैं। इससे भी रैंकिंग प्रभावित हुई है। की थी। इस पत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिक्षा विभाग को इस संदर्भ में नीति बनाने को कहा है। शिक्षा निदेशालय ने सरकार के आदेशानुसार नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नवीं से जमा दो कक्षा तक नाइलेट कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। बीते दिनों ही सरकार ने कंपनी को एक साल का सेवा विस्तार दिया है। 30 जून 2019 तक सरकार ने कंपनी को एक्सटेंशन दी है। 1383 कंप्यूटर शिक्षक बीते कई सालों से अपने लिए अनुबंध नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व सरकार ने शिक्षकों के लिए नीति बनाने की घोषणा की थी। साल 2017 मे उच्च शिक्षा निदेशालय ने साक्षात्कार के माध्यम से 1093 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी लेकिन मामला प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में फंस गया। ट्रिब्यूनल ने भर्ती पर रोक लगाई हुई है। वर्तमान में भी यह कोर्ट में विचाराधीन है।