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वेतन कम करने की अधिसूचना वापस ले सरकार : राजेश
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विवि कर्मचारियों ने कुलपति को सौंपा मांग पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संगठन ने हिमाचल प्रदेश सिविल सेवाएं (संशोधन वेतन) नियम-2022 में संशोधन की अधिसूचना का विरोध किया। संगठन ने कुलपति के माध्यम से प्रदेश सरकार को मांग पत्र देकर अधिसूचना तुरंत वापस लेने की मांग की।
संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर की अगुवाई में उपाध्यक्ष ललित कुमार, सह सचिव मोहन लाल शर्मा, महासचिव गीता राम ठाकुर और संगठन सचिव सुरेंद्र सिंह वर्मा ने कुलपति प्रो. महावीर वर्मा से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा।
राजेश ठाकुर ने कहा कि एचपीयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने भविष्य में आम कर्मचारियों को होने वाले आर्थिक नुकसान के बारे में सरकार को अवगत करवाया है। प्रदेश सरकार के वित्त वेतन परिशोधन विभाग की छह सितंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार प्रदेश और विश्वविद्यालयों के विभिन्न श्रेणी के कर्मचारियों को वर्तमान और भविष्य में प्रतिमाह दस से पंद्रह हजार रुपये का नुकसान होगा।
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उन्होंने कहा कि किसी भी आरंभिक श्रेणी के कर्मचारी का मासिक वेतन पहले से ही कम होता है। इस फैसले से कर्मचारी हताश और निराश हो रहे हैं। संघ ने आरोप लगाया कि कुछ लोग षड्यंत्र रचकर सरकार से कर्मचारी विरोधी फैसले करवा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि कर्मचारियों के प्रति सकारात्मक रुख रखते हुए उनकी भावनाओं के मद्देनजर वित्त वेतन परिशोधन विभाग की अधिसूचना को रद्द किया जाए, ताकि विश्वविद्यालय और आम कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संगठन ने हिमाचल प्रदेश सिविल सेवाएं (संशोधन वेतन) नियम-2022 में संशोधन की अधिसूचना का विरोध किया। संगठन ने कुलपति के माध्यम से प्रदेश सरकार को मांग पत्र देकर अधिसूचना तुरंत वापस लेने की मांग की।
संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर की अगुवाई में उपाध्यक्ष ललित कुमार, सह सचिव मोहन लाल शर्मा, महासचिव गीता राम ठाकुर और संगठन सचिव सुरेंद्र सिंह वर्मा ने कुलपति प्रो. महावीर वर्मा से मुलाकात कर उन्हें मांग पत्र सौंपा।
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राजेश ठाकुर ने कहा कि एचपीयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने भविष्य में आम कर्मचारियों को होने वाले आर्थिक नुकसान के बारे में सरकार को अवगत करवाया है। प्रदेश सरकार के वित्त वेतन परिशोधन विभाग की छह सितंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार प्रदेश और विश्वविद्यालयों के विभिन्न श्रेणी के कर्मचारियों को वर्तमान और भविष्य में प्रतिमाह दस से पंद्रह हजार रुपये का नुकसान होगा।
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उन्होंने कहा कि किसी भी आरंभिक श्रेणी के कर्मचारी का मासिक वेतन पहले से ही कम होता है। इस फैसले से कर्मचारी हताश और निराश हो रहे हैं। संघ ने आरोप लगाया कि कुछ लोग षड्यंत्र रचकर सरकार से कर्मचारी विरोधी फैसले करवा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि कर्मचारियों के प्रति सकारात्मक रुख रखते हुए उनकी भावनाओं के मद्देनजर वित्त वेतन परिशोधन विभाग की अधिसूचना को रद्द किया जाए, ताकि विश्वविद्यालय और आम कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।