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Shimla News: कुफरी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए कदम उठाए सरकार

Thu, 07 Nov 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 11:59 PM IST
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Government should take steps to stop increasing pollution in Kufri
खास खबर
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश, रिपोर्ट में खुलासा घोड़ों के गोबर और कचरे के निपटान के लिए कुछ नहीं किया
पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छता के लिए उठाएं कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यटन स्थल कुफरी में घोड़ों के संचालन के कारण बढ़ते प्रदूषण और गंदगी पर सख्त रुख अपनाया है।
एनजीटी ने हाल ही में दायर एक रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदेश सरकार को समय पर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी में दायर रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में प्रतिदिन 1029 घोड़ों से उत्पन्न होने वाले 5 टन गोबर और अन्य कचरे के उचित प्रबंधन के लिए प्रशासन ने कोई ठोस योजना लागू नहीं की है। रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि घोड़े गोबर को सुखाकर उच्च उष्मा मूल्य में परिवर्तित करने की क्षमता की जांच की जाए।

इसके लिए एक स्क्रू फिल्टर प्रेस मशीन और गोबर के कंबल निर्माण के लिए मशीन लगाई जा सकती है। इसका सीमेंट प्लांट या बॉयलर उद्योग में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाए। हालांकि इस प्रस्ताव के बावजूद रिपोर्ट में अब तक किसी योजना के क्रियान्वयन की जानकारी नहीं दी है। रिपोर्ट में लिखा है कि नाग देवता आश्रित समूह और नवचेतना ट्रांसपोर्टर के बीच कचरा निपटान के लिए एक समझौता हुआ है। अब तक 3,194 किलोग्राम कचरे का निपटान किया जा चुका है। लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि क्षेत्र में कितना कचरा जमा है और इसका निपटारा कैसे किया जाएगा। एनजीटी ने कहा कि प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्यावरणीय सुरक्षा और स्वच्छता के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। पर्यावरण को संरक्षित रखने के साथ रोजगार को सुरक्षित रखने के लिए भी एक संतुलित समाधान आवश्यक है। फरवरी में होने वाली अगली सुनवाई तक एनजीटी ने संयुक्त समिति को नई रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं।
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बायो मिथेनेशन प्लांट लगाने की सिफारिश
प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सुझाव दिया है कि क्षेत्र में 6 मीट्रिक टन क्षमता वाले बायो मिथेनेशन प्लांट की स्थापना की जाए। यह प्लांट घोड़ों के गोबर को जैविक गैस में परिवर्तित करने में मदद करेगा जिससे पर्यावरणीय हानि को कम किया जा सकेगा। इस प्लांट की अनुमानित लागत 6 करोड़ रुपये है लेकिन वन विभाग के डीएफओ, ठियोग द्वारा दायर रिपोर्ट में अब तक इस संबंध में किसी ठोस कार्य योजना का उल्लेख नहीं किया है।
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घोड़ा संचालकों से वसूली राशि का हिसाब दे वन विभाग
एनजीटी की सुनवाई के दौरान घोड़ा यूनियन के वकील ने बताया कि प्रत्येक घोड़े पर प्रति यात्रा 50 रुपये शुल्क का भुगतान किया जाता है। वन विभाग द्वारा प्रतिदिन इस शुल्क के रूप में लगभग एक लाख रुपये एकत्र किए जाते हैं, जिसे गोबर प्रबंधन और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एनजीटी ने निर्देश दिए कि वन विभाग पांच सालों में एकत्र की गई राशि का पूरा हिसाब दें। यह भी बताया जाए कि इस राशि का कचरा निपटान या अन्य समस्याओं के समाधान में कैसे उपयोग किया गया। वहीं डीएफओ ठियोग मनीश रामपाल ने बताया वह कुफरी के घोड़ा मालिक संघ के साथ बातचीत कर समस्या के समाधान का प्रयास करेंगे। वन विभाग घोड़ों की संख्या का सही आकलन लगाएगा।
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