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हजारों कॉलेज विद्यार्थियों से लाखों की अवैध वसूली, नपेंगे कई प्रिंसिपल

Mon, 13 Jan 2020 12:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 13 Jan 2020 12:04 PM IST
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government colleges in Himachal take money illegaly form students
सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल के कई सरकारी कॉलेजों में हजारों विद्यार्थियों से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई है। इन कॉलेजों में विकास शुल्क के नाम पर 200 के बजाय 500 रुपये तक वसूल लिए गए। राज्य लेखा परीक्षा विभाग के ऑडिट में यह खुलासा हुआ है। इस मामले को राज्य सरकार के ध्यान में भी ला दिया गया है। जांच के बाद इस मामले में कई प्रिंसिपल नप सकते हैं।   

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बड़ी बात यह है कि गरीब आईआरडीपी विद्यार्थियों से भी यह अवैध वसूली कर ली गई। पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई इस वसूली को हिमाचल प्रदेश लेखा परीक्षा विभाग ने अपने ऑडिट में पकड़ा है। इस मामले को गंभीर अनियमितता की श्रेणी में रखते हुए इसे मौजूदा सरकार के ध्यान में लाया गया है। अब इस वसूली के लिए जिम्मेवार कॉलेज प्रशासनों पर जांच भी बैठाई जा सकती है। 
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यह खुलासा वर्ष 2013 से लेकर 2018 के दौरान के दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद हुआ है। उदाहरण के लिए यहां दो कॉलेजों की बात करें तो राजकीय महाविद्यालय करसोग में 3,08,350 रुपये की अवैध रूप से अतिरिक्त वसूली की गई। यह वसूली वर्ष 2014-15 में 1062 विद्यार्थियों से की गई। इनमें से आईआरडीपी के 41 विद्यार्थियों से इसे 250 रुपये प्रति विद्यार्थी की दर से वसूला गया।
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बाकी से 500 रुपये के हिसाब से वसूली हुई। इसी तरह से 2014-15 में ही मंडी जिले की तहसील गोहर के राजकीय महाविद्यालय बासा में भी इसी दर से विकास शुल्क वसूला गया। यहां 705 सामान्य श्रेणी और 371 आईआरडीपी विद्यार्थियों से 2,67,150 रुपये की अधिक वसूली की गई। ऐसे कई मामले हैं। 

200 रुपये प्रति विद्यार्थी ही हो सकती थी वसूली 
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शैक्षणिक शाखा की अधिसूचना संख्या : 5-25/2013 हि.प्र. (शै.) के अनुसार विकास शुल्क 200 रुपये प्रति विद्यार्थी तय किया गया, मगर इसे सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों से 500 रुपये और आईआरडीपी के विद्यार्थियों से 250 रुपये की दर से वसूला गया। 

कुछ कॉलेजों ने रेड क्रॉस और एससीए निधि की भी अवैध वसूली की 
जिला चंबा के राजकीय महाविद्यालय सलूणी में विद्यार्थियों से जूनियर रेडक्रॉस निधि के रूप में वर्ष 2013-14 मेें छह रुपये और वर्ष 2017-18 में प्रति छात्र 10 रुपये की दर से पैसे लिए गए। यह वसूली भी करीब 450 विद्यार्थियों से हुई। नियमानुसार ऐसी कोई निधि ही नहीं होती।


राजकीय महाविद्यालय थुरल मेें भी वर्ष 2013 से 2018 के बीच रेडक्रॉस और एससीए निधियों के रूप में करीब 40 हजार रुपये की अवैध वसूली हुई, जबकि ऐसी वसूली कानूनी तौर पर सही नहीं है।

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