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खुशवंत सिंह लिटफेस्ट: गीतांजलि श्री बोलीं- हिंदी से लगाव, पर अब अंग्रेजी में भी साहित्य लिखूंगी
Sun, 16 Oct 2022 10:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 16 Oct 2022 10:29 PM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री ने कहा कि भले ही वर्तमान युग में अंग्रेजी का अधिक बोलबाला है, लेकिन हमें अपनी बात कहने के लिए हिंदी विषय आसान होता है।
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अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री।
- फोटो : संवाद
विस्तार
कसौली में चल रहे खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का रविवार को समापन हो गया। लिटफेस्ट के अंतिम दिन अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री ने कहा कि उन्हें हिंदी से लगाव है और हिंदी में ही साहित्य लिखना पसंद है, लेकिन अब वह अंग्रेजी में भी साहित्य लिखेंगी। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि भले ही वर्तमान युग में अंग्रेजी का अधिक बोलबाला है, लेकिन हमें अपनी बात कहने के लिए हिंदी विषय आसान होता है। जब तक अंग्रेजी विषय पर साहित्य लिखने में आत्मविश्वास नहीं होगा, वह नहीं लिखेंगी। हालांकि, उन्होंने जल्द अंग्रेजी में साहित्य लिखने की बात कही। गीतांजलि श्री ने कहा कि एक किताब लिखने के लिए आठ से नौ वर्ष लगते हैं।
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वहीं, इस मौके पर भारत और पाकिस्तान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। एडवांस्ड स्टडी शिमला के पूर्व निदेशक एवं जेएनयू के प्रोफेसर मकरंद परांजपे ने कहा कि बंटवारे से बेशक भारत और पाकिस्तान दो देश बन गए, लेकिन दोनों देशों के लोगों का दिल एक ही है। लोगों के प्यार के लिए लोगों को ही कदम उठाना चाहिए। मुस्लिम महिला और हिंदू के प्यार को गलत ठहराए जाने के विषय पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बंटवारे के बाद दो देशों की सीमाएं ही अलग हुईं हैं।
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मुस्लिम महिला हिंदू पुरुष से प्यार कर सकती है। सबकी अपनी-अपनी भावनाएं होती हैं। गीतांजलि श्री ने कहा कि प्यार और संबंध ही सभी को आगे बढ़ाते हैं। परांजपे और गीतांजलि श्री ने रेत समाधि विषय पर भी मंथन किया। गौर हो कि इस साल का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार गीतांजलि श्री को उपन्यास रेत समाधि के अंग्रेजी अनुवाद टॉम्ब ऑफ सैंड के लिए दिया गया। यह पहली बार है कि किसी भारतीय भाषा के अनुवाद को यह पुरस्कार मिला है।
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