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सेब के बगीचों में अब नहीं लगेगा कीड़ा, विदेश से आएगी स्प्रे गैस

Sat, 31 Dec 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 31 Dec 2016 11:38 PM IST
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Gas will be imported from america for spray in apple orchards

सेब के नए बगीचों को रोगमुक्त बनाने के लिए अमेरिका से क्लोरोपिकरिन गैस का आयात किया जाएगा। बगीचे लगाने से पहले इस गैस से बगीचों की मिट्टी को स्टेरिलाइज किया जाएगा। इससे इन बगीचों में कई तरह के हानिकारक कीटाणुओं, कीड़ों और फंगस को खत्म किया जा सकेगा। यह फैसला शनिवार को हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं विधायन निगम (एचपीएमसी) की बैठक में लिया गया।

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यह बैठक एचपीएमसी के उपाध्यक्ष प्रकाश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। निदेशक मंडल के सदस्यों के अलावा इस बैठक में प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा, निदेशक बागवानी डा. एचएस बवेजा, एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक हिमांशु शेखर चौधरी भी विशेष रूप से मौजूद रहे। अमेरिका में सेब के बगीचे लगाने से पहले मिट्टी को स्टेरिलाइज किया जाता है।
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इसके लिए क्लोरोपिकरिन गैस का इस्तेमाल किया जाता है। इस गैस की मिट्टी के भीतर मशीनों से पंपिंग की जाती है। जब मिट्टी रोग रहित हो जाए तो ही उसमें सेब के पौधे लगाए जाते हैं। इससे सेब के पौधे ठीक से उगते हैं। वे ठीक से पोषक तत्वों को भी ले पाते हैं। बैठक के समापन के बाद एचपीएमसी शिमला के उपाध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि  भारत मेें यह गैस पहली बार एचपीएमसी लाने जा रहा है।
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इस बारे में भारत सरकार के साथ तमाम तरह का संवाद जारी है। केंद्र सरकार से इसके आयात की इजाजत मिल चुकी है। उम्मीद है कि इसे मार्च माह तक हिमाचल में पहुंचा दिया जाएगा। इस गैस की कितनी मात्रा को अभी भारत के लिए आयात किया जाना है।इस पर स्थिति साफ नहीं है। भारत सरकार के साथ इस बारे में बात चल रही है।


प्रकाश ठाकुर ने जानकारी दी कि इस गैस को मैसर्ज ट्रिनिटी मेन्युफैचरिंग यूएसए से खरीदा जा रहा है। एसएआरडी स्पेसिफिक एप्पल रिप्लांटेशन रोग भारत में बड़ी समस्या है। यह खासकर तब जब पुराने बगीचों में नए पौधों का रोपण करना होता है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के ऊपर रोगों, कीटाणुओं, फंगस आदि के लिए तो कई तरह के छिड़काव किए जा सकते हैं। जमीन के नीचे इन्हें खत्म करने का एकमात्र रास्ता इसी गैस का इस्तेमाल है।

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