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Shimla News: शिमला-किन्नौर में नाशपाती की रिकॉर्ड पैदावार, मंडियों में 4.25 लाख ज्यादा पहुंचीं पेटियां
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पिछले वर्ष 1.37 लाख में ही सिमट गया था कारोबार, इस साल पेटियों की संख्या 5.73 लाख से पार
जिले में इस साल सेब से ज्यादा थी नाशपाती की पैदावार, 2600 रुपये तक बिकी 20 किलो की पेटी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शिमला-किन्नौर की फल मंडियों में इस वर्ष 4 लाख 25 हजार 983 ज्यादा नाशपाती की पेटियां पहुंची हैं। पिछले वर्ष 1 लाख 37 हजार पेटियां मंडी में पहुंची थीं, वहीं इस साल यह आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
एपीएमसी की ओर से मिले आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष शिमला-किन्नौर की फल मंडियों में 5 लाख 73 हजार से ज्यादा नाशपाती की पेटियां पहुंच चुकी हैं। सीजन अंतिम चरण पर है। इस साल जिला शिमला में नाशपाती की अच्छी पैदावार रही। हालांकि सूखे के चलते शिमला में इस बार नाशपाती का सीजन एक माह देरी से शुरू हुआ है। बावजूद इसके चार गुना ज्यादा नाशपाती की पेटियां फल मंडियों में पहुंची हैं। ज्यादा फसल होने के चलते इस बार बागवानाें को ज्यादा दाम नहीं मिले। इस वर्ष नाशपाती के 15 से 30 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिले हैं। गत वर्ष 20 से 190 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिले थे, क्योंकि उस दौरान फसल कम थी।
भट्ठाकुफर फल मंडी में पिछले साल 18 हजार 789 पेटी नाशपाती पहुंची थी, वहीं इस साल अभी तक 1 लाख 39 हजार 653 पेटियां मंडी में पहुंच चुकी हैं। हालांकि अभी सीजन पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। अभी फल मंडी में तुंबा नाशपाती की खेप पहुंच रही है। इसकी 12 किलो की पेटी 800 से 900 रुपये तक बिक रही है।
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बागवानों के अनुसार नाशपाती के पौधों के रखरखाव में सेब के पौधों से कम मेहनत लगती है। इसके चलते नाशपाती उत्पादन बागवानों की पसंद बन रहा है। बागवानों को इसके उत्पादन में खर्च कम आ रहा है, जबकि मुनाफा अधिक हो रहा है। सेब पर कीटनाशकों और फफूंद नाशकों का खर्च अधिक रहता है, जबकि नाशपाती के बगीचों में अपेक्षाकृत कम व्यय होता है। नाशपाती की खेती हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और कम सर्दी वाली किस्मों की खेती है।
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..इनसेट
ये हैं नाशपाती की किस्में
नाशपती की बहुत सी किस्में होती हैं। पैखम थ्रंप्स नाशपाती अधिक समय तक टिकी रहती है। कलम करने के तीसरे साल इसमें फल आने लगते हैं। ब्यूरीबोसिक नाशपाती भूरे रंग की होती है। इसमें फल जल्दी आते हैं। यह किस्म पैखम नाशपाती के लिए पोलीनेटर भी है। डायनाड्यूकोमिक नाशपाती फ्रांस की किस्म है। यह अगस्त के अंत में तैयार होती है। इसका रंग हल्का पीला रहता है। कॉनकार्ड, टेलर गोल्ड, गोल्डन रसलेट,वार्डन सेकल, ग्रीन एंड रेड एंजो और कारमैन इसकी प्रमुख किस्में हैं।
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कोट
हर तीसरे साल होते हैं फल के बीमे मजबूत : प्रताप चौहान
भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रताप चौहान ने बताया कि हर तीसरे साल फलों के बीमें मजबूत होते हैं, इस साल फसल की पैदावार भी अधिक है। गत दो वर्षों से मंडी में कम नाशपाती की पेटियां पहुंची हैं। इस साल पौधों का बीमा मजबूत था, जिसके चलते पैदावार अधिक हुई है। इसके बाद अब अगले साल नाशपाती की कम फसल होने की उम्मीद है।
-प्रताप चौहान, प्रधान, फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन
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कोट
पैदावार ज्यादा होने के चलते बागवानों को मिले कम दाम : देवानंद वर्मा
इस साल एपीएमसी शिमला-किन्नौर की फल मंडियों में नाशपाती की रिकॉर्ड पेटियां पहुंची हैं। पैदावार ज्यादा होने के चलते गत वर्ष के मुकाबले नाशपाती के कम दाम मिल हैं। अभी भी फल मंडियों में नाशपाती की पेटियां पहुंच रही हैं। -देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी शिमला-किन्नौर
जिले की फल मंडियों में पहुंची नाशपाती की पेटियां
फल मंडी बीते वर्ष इस वर्ष
भट्ठाकुफर 18,789 1,39,653
पराला 71,531 2,68,864
मेहंदली 43,547 1,57,407
नेरवा 3,192 7,118
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जिले में इस साल सेब से ज्यादा थी नाशपाती की पैदावार, 2600 रुपये तक बिकी 20 किलो की पेटी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शिमला-किन्नौर की फल मंडियों में इस वर्ष 4 लाख 25 हजार 983 ज्यादा नाशपाती की पेटियां पहुंची हैं। पिछले वर्ष 1 लाख 37 हजार पेटियां मंडी में पहुंची थीं, वहीं इस साल यह आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
एपीएमसी की ओर से मिले आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष शिमला-किन्नौर की फल मंडियों में 5 लाख 73 हजार से ज्यादा नाशपाती की पेटियां पहुंच चुकी हैं। सीजन अंतिम चरण पर है। इस साल जिला शिमला में नाशपाती की अच्छी पैदावार रही। हालांकि सूखे के चलते शिमला में इस बार नाशपाती का सीजन एक माह देरी से शुरू हुआ है। बावजूद इसके चार गुना ज्यादा नाशपाती की पेटियां फल मंडियों में पहुंची हैं। ज्यादा फसल होने के चलते इस बार बागवानाें को ज्यादा दाम नहीं मिले। इस वर्ष नाशपाती के 15 से 30 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिले हैं। गत वर्ष 20 से 190 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिले थे, क्योंकि उस दौरान फसल कम थी।
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भट्ठाकुफर फल मंडी में पिछले साल 18 हजार 789 पेटी नाशपाती पहुंची थी, वहीं इस साल अभी तक 1 लाख 39 हजार 653 पेटियां मंडी में पहुंच चुकी हैं। हालांकि अभी सीजन पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। अभी फल मंडी में तुंबा नाशपाती की खेप पहुंच रही है। इसकी 12 किलो की पेटी 800 से 900 रुपये तक बिक रही है।
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बागवानों के अनुसार नाशपाती के पौधों के रखरखाव में सेब के पौधों से कम मेहनत लगती है। इसके चलते नाशपाती उत्पादन बागवानों की पसंद बन रहा है। बागवानों को इसके उत्पादन में खर्च कम आ रहा है, जबकि मुनाफा अधिक हो रहा है। सेब पर कीटनाशकों और फफूंद नाशकों का खर्च अधिक रहता है, जबकि नाशपाती के बगीचों में अपेक्षाकृत कम व्यय होता है। नाशपाती की खेती हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और कम सर्दी वाली किस्मों की खेती है।
..इनसेट
ये हैं नाशपाती की किस्में
नाशपती की बहुत सी किस्में होती हैं। पैखम थ्रंप्स नाशपाती अधिक समय तक टिकी रहती है। कलम करने के तीसरे साल इसमें फल आने लगते हैं। ब्यूरीबोसिक नाशपाती भूरे रंग की होती है। इसमें फल जल्दी आते हैं। यह किस्म पैखम नाशपाती के लिए पोलीनेटर भी है। डायनाड्यूकोमिक नाशपाती फ्रांस की किस्म है। यह अगस्त के अंत में तैयार होती है। इसका रंग हल्का पीला रहता है। कॉनकार्ड, टेलर गोल्ड, गोल्डन रसलेट,वार्डन सेकल, ग्रीन एंड रेड एंजो और कारमैन इसकी प्रमुख किस्में हैं।
कोट
हर तीसरे साल होते हैं फल के बीमे मजबूत : प्रताप चौहान
भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रताप चौहान ने बताया कि हर तीसरे साल फलों के बीमें मजबूत होते हैं, इस साल फसल की पैदावार भी अधिक है। गत दो वर्षों से मंडी में कम नाशपाती की पेटियां पहुंची हैं। इस साल पौधों का बीमा मजबूत था, जिसके चलते पैदावार अधिक हुई है। इसके बाद अब अगले साल नाशपाती की कम फसल होने की उम्मीद है।
-प्रताप चौहान, प्रधान, फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन
कोट
पैदावार ज्यादा होने के चलते बागवानों को मिले कम दाम : देवानंद वर्मा
इस साल एपीएमसी शिमला-किन्नौर की फल मंडियों में नाशपाती की रिकॉर्ड पेटियां पहुंची हैं। पैदावार ज्यादा होने के चलते गत वर्ष के मुकाबले नाशपाती के कम दाम मिल हैं। अभी भी फल मंडियों में नाशपाती की पेटियां पहुंच रही हैं। -देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी शिमला-किन्नौर
जिले की फल मंडियों में पहुंची नाशपाती की पेटियां
फल मंडी बीते वर्ष इस वर्ष
भट्ठाकुफर 18,789 1,39,653
पराला 71,531 2,68,864
मेहंदली 43,547 1,57,407
नेरवा 3,192 7,118