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Shimla News: संघर्ष से सम्मान तक, युवा खिलाड़ियों की प्रेरक उड़ान
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पोर्टमोर स्कूल में आयोजित सम्मान समारोह में खिलाड़ियों ने साझा की अपने संघर्ष की कहानी
हर्षित शर्मा
शिमला। पोर्टमोर स्कूल में शनिवार को 69वें स्कूल नेशनल गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। मंच पर सिर्फ मेडल नहीं बंटे बल्कि उन युवाओं की कहानियां भी सामने आईं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा।
हिमाचल के गांवों से आने वाले यह खिलाड़ी पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाते हुए रोज कई घंटे अभ्यास करते हैं। परिवारों ने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उनका साथ नहीं छोड़ा, प्रशिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई।
सीनियर टीम में जगह बनाना लक्ष्य : प्रीति
टीआरएलएस जेवीजीएसएस कोटखाई की छात्रा प्रीति वॉलीबाल अंडर-19 वर्ग में चीन में आयोजित प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन पलक भी वॉलीबाल खिलाड़ी हैं। उन्हें खेलते देखकर ही उन्होंने इस खेल को अपनाया। रोजाना घंटों अभ्यास, फिटनेस और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना उनकी दिनचर्या है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की जर्सी पहनना उनके जीवन का सबसे यादगार पल था। अब उनका लक्ष्य भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाना और देश के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना है। उनका मानना है कि गांवों की बेटियां भी अवसर मिलने पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।
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भारत के लिए खेलना लक्ष्य : कुश
जीवीएसएसएस मटियाना के छात्र कुश चौहान ने राष्ट्रीय विद्यालय खेलों की अंडर-19 वॉलीबाल प्रतियोगिता में अपनी टीम के साथ रजत पदक जीता। उनका पूरा ध्यान खेल पर है और वह भारतीय टीम के लिए खेलना चाहते हैं। इनके पिता अशोक चौहान किसान हैं। कुश अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के कोच देवेंद्र चंदेल को देते हैं। कोच ने खेल की बारीकियां सिखाने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाया। सुबह फिटनेस और शाम को कोर्ट पर अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
ओलंपिक पदक पर नजर : चिराग
जीएसएसएस रामपुर के छात्र चिराग इस समय आयरलैंड में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने इस वर्ष ईटानगर में अंडर-17 प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। बेहतर खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करने का अवसर मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। वह फिटनेस, तकनीक और मानसिक तैयारी पर बराबर काम कर रहे हैं। चिराग ने बताया कि उनका अंतिम लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। वह मानते हैं कि हर प्रतियोगिता और हर प्रशिक्षण सत्र उन्हें उस सपने के करीब ले जा रहा है।
खेल के लिए छोड़ा निजी स्कूल : आस्था
हैंडबाल खिलाड़ी आस्था ने बेहतर खेल सुविधाओं के लिए निजी स्कूल छोड़कर जीएसएसएस मोरसिंघी बिलासपुर में प्रवेश लिया। इनके पिता संजीव कुमार और मां ने शुरू से उनका साथ दिया। नियमित अभ्यास, फिटनेस और प्रतियोगिताओं की तैयारी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। आस्था का कहना है कि सही खेल माहौल मिलने से प्रदर्शन में बड़ा बदलाव आया। अब उनका सपना भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना है।
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हर्षित शर्मा
शिमला। पोर्टमोर स्कूल में शनिवार को 69वें स्कूल नेशनल गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। मंच पर सिर्फ मेडल नहीं बंटे बल्कि उन युवाओं की कहानियां भी सामने आईं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा।
हिमाचल के गांवों से आने वाले यह खिलाड़ी पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाते हुए रोज कई घंटे अभ्यास करते हैं। परिवारों ने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उनका साथ नहीं छोड़ा, प्रशिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई।
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सीनियर टीम में जगह बनाना लक्ष्य : प्रीति
टीआरएलएस जेवीजीएसएस कोटखाई की छात्रा प्रीति वॉलीबाल अंडर-19 वर्ग में चीन में आयोजित प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन पलक भी वॉलीबाल खिलाड़ी हैं। उन्हें खेलते देखकर ही उन्होंने इस खेल को अपनाया। रोजाना घंटों अभ्यास, फिटनेस और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना उनकी दिनचर्या है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की जर्सी पहनना उनके जीवन का सबसे यादगार पल था। अब उनका लक्ष्य भारतीय सीनियर टीम में जगह बनाना और देश के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना है। उनका मानना है कि गांवों की बेटियां भी अवसर मिलने पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।
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भारत के लिए खेलना लक्ष्य : कुश
जीवीएसएसएस मटियाना के छात्र कुश चौहान ने राष्ट्रीय विद्यालय खेलों की अंडर-19 वॉलीबाल प्रतियोगिता में अपनी टीम के साथ रजत पदक जीता। उनका पूरा ध्यान खेल पर है और वह भारतीय टीम के लिए खेलना चाहते हैं। इनके पिता अशोक चौहान किसान हैं। कुश अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के कोच देवेंद्र चंदेल को देते हैं। कोच ने खेल की बारीकियां सिखाने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाया। सुबह फिटनेस और शाम को कोर्ट पर अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
ओलंपिक पदक पर नजर : चिराग
जीएसएसएस रामपुर के छात्र चिराग इस समय आयरलैंड में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने इस वर्ष ईटानगर में अंडर-17 प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। बेहतर खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करने का अवसर मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। वह फिटनेस, तकनीक और मानसिक तैयारी पर बराबर काम कर रहे हैं। चिराग ने बताया कि उनका अंतिम लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। वह मानते हैं कि हर प्रतियोगिता और हर प्रशिक्षण सत्र उन्हें उस सपने के करीब ले जा रहा है।
खेल के लिए छोड़ा निजी स्कूल : आस्था
हैंडबाल खिलाड़ी आस्था ने बेहतर खेल सुविधाओं के लिए निजी स्कूल छोड़कर जीएसएसएस मोरसिंघी बिलासपुर में प्रवेश लिया। इनके पिता संजीव कुमार और मां ने शुरू से उनका साथ दिया। नियमित अभ्यास, फिटनेस और प्रतियोगिताओं की तैयारी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। आस्था का कहना है कि सही खेल माहौल मिलने से प्रदर्शन में बड़ा बदलाव आया। अब उनका सपना भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना है।