हिमाचल में फिर बदला मौसम, रोहतांग दर्रे पर अप्रैल में हिमपात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में एक बार फिर मौसम ने करवट बदली है। दिन भर बादलों की लुकाछिपी के बाद शाम को प्रदेश के कई क्षेत्रों में तूफान और झमाझम बारिश से तापमान में गिरावट आ गई है। हालांकि दिन को तापमान ज्यादा होने से लोगों को गर्मी महसूस हो रही थी।
पांच साल बाद अप्रैल के आखिरी सप्ताह में रोहतांग दर्रे समेत चंबा के भरमौर और अन्य उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात हुआ है। लाहौल में भी बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। राजधानी शिमला, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, सोलन, मंडी, कुल्लू, चंबा में शाम को तूफान ने कई इमारतों की छतों को नुकसान पहुंचाया।
इसके बाद गर्जना के साथ जोरदार बारिश हुई। गुरुवार को भी प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। 26 से 29 तक मौसम साफ रहने की संभावना है। 30 अप्रैल से फिर बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
किसान-बागवानों की चिंता बढ़ी
मंगलवार देर रात से लाहौल और कुल्लू घाटी में मौसम खराब होने से रोहतांग दर्रे समेत लाहौल-स्पीति, चंबा की ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी हुई है। रोहतांग में दस सेंटीमीटर और लाहौल की चोटियों पर तीन से पांच सेंटीमीटर तक ताजा बर्फबारी हुई है। ठंड से बचने के लिए लोगों ने अलाव जलाना शुरू कर दिया है।
मौसम के बदलते तेवर से बीआरओ के साथ लाहौल के किसान-बागवानों की चिंता बढ़ गई है। बीआरओ को रोहतांग बहाल करने में लिए अभी करीब 50 किलोमीटर सड़क से बर्फ हटाने का कार्य शेष है।
अंधड़ से गेहूं, आम-लीची को नुकसान
तेज हवाओं से ऊना के एमसी पार्क में स्थापित तिरंगे को भी क्षति पहुंची है। प्रदेश में कई क्षेत्रों में शाम को अंधड़ चलने से गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। कई जगह काटी गई गेहूं तूफान से बिखर गई।
इसके अलावा आम और लीची को भी नुकसान हुआ है। फलदार पौधों के फूल झड़ने से फसल की पैदावार प्रभावित होगी। इससे बागवानों और किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। तूफान से सेब के पौधों को भी नुकसान पहुंचा है।