पश्चिम बंगाल में महकेगी हिमाचल की सुगंधित फसलों की खुशबू, एमओयू साइन
अरोमा मिशन के तहत हो रहे सुगंधित फसलों की खुशबू अब पश्चिमी बंगाल में भी महकेगी। साथ ही यहां के किसानों की आर्थिक मजबूत होगी। पश्चिमी बंगाल में सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनी ट्रस्ट, कलिम्पोंगप (पश्चिम बंगाल) के साथ समझौता किया है।
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हिमाचल प्रदेश के सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान पालमपुर की ओर से पिछले सालों से अरोमा मिशन के तहत हो रहे सुगंधित फसलों की खुशबू अब पश्चिमी बंगाल में भी महकेगी। साथ ही यहां के किसानों की आर्थिक मजबूत होगी। पश्चिमी बंगाल में सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनी ट्रस्ट, कलिम्पोंगप (पश्चिम बंगाल) के साथ समझौता किया है। अब सीएसआईआर की यह खेती बंगाल के कलिम्पोंगप में भी होगी। विविध जलवायु और यहां के मौसम के चलते सीएसआईआर-आईएचबीटी ने इस क्षेत्र को सुगंधित और फूलों की खेती के लिए चयनित किया है।
सुभाष मणि सिंह, अध्यक्ष, मणि ट्रस्ट, जिला कलिम्पोंग, पश्चिम बंगाल ने इन फसलों में अपनी रुचि दिखाई है। लिहाजा, यह एमओयू साइन हुआ है। आईएचबीटी में अरोमा मिशन के सह नोडल एवं वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का झुकाव बढ़ रहा है, जिसके कारण सौंदर्य प्रसाधन, भोजन और पेय पदार्थों में आवश्यक तेलों का उपयोग बढ़ गया है। कहा कि कलिम्पोंग क्षेत्र उच्च मूल्य वाली सुगंधित फसलों जैसे कि गुलाब, मुशकबाला, पुदीना, जंगली गेंदा, सुगंधित गेरियम, लेमनग्रास और कैमोमाइल की खेती के लिए उपयुक्त है।
सीएसआईआर पालमपुर के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि सीएसआईआर ने 2017 और 2020 के दौरान अरोमा और फ्लोरीकल्चर मिशन की शुरुआत की थी। सुगंधित पौधों के मूल्यवर्धन के लिए प्रसंस्करण इकाई अपरिहार्य है और कलिम्पोंग में इस सुविधा की स्थापना से स्थानीय किसानों को लाभ होगा।
ओरामा