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आईजीएमसी के चिल्ड्रन वार्ड में चौथे बच्चे की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 25 Apr 2015 11:56 PM IST
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आईजीएमसी अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में वेंटिलेटर पर रखे चौथे बच्चे की भी मौत हो गई। चौपाल का रहने वाला यश (13) 16 अप्रैल से अस्पताल में भर्ती था। बच्चे की मौत पर परिजन बिफर गए हैं। अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि बच्चे का न तो सिटी स्कैन किया, न अल्ट्रासाउंड और न ही एमआरआई।
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बच्चे की हालत अगर गंभीर थी तो उसे रेफर क्यों नहीं किया? शनिवार को बच्चे के शव को लेकर परिजन चौपाल चले गए। राज्य स्तरीय अस्पताल आईजीएमसी में एक सप्ताह में वेंटिलेटर पर रखे चार बच्चों की मौत पर बवाल खड़ा हो गया है। अस्पताल प्रबंधन की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। मृतक बच्चे के पिता सीताराम शर्मा, चाचा डीआर शर्मा ने बताया कि उनका बेटा यश (14) नौंवी कक्षा में पढ़ता था।
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16 अप्रैल को आईजीएमसी के चिल्ड्रन वार्ड में बच्चे को भर्ती करवाया। डाक्टरों ने यश की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे वेंटिलेटर पर रखा। यश के पिता सीताराम शर्मा स्कूल टीचर हैं। 14 अप्रैल की शाम को यश को बुखार था। दवाई देने के बाद वह ठीक था। 15 अप्रैल को उसके शरीर में दो-तीन दाने हुए और चेस्ट में पेन हुआ। इसके बाद उसे नेरवा अस्पताल ले जाया गया जहां से डाक्टर ने उसे आईजीएमसी ले जाने के लिए कहा।
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16 अप्रैल की शाम को यश को लेकर आईजीएमसी पहुंचे जहां उसे भर्ती कर लिया। डाक्टरों ने कहा कि बच्चा सीरियस है और बचने की गारंटी नहीं दे सकते। बच्चे के परिवार वालों ने जब पीजीआई जाने की बात कही तो उन्हें मना कर दिया। कहा कि ले जाना है तो अपने रिस्क पर ले जाओ। सीताराम शर्मा ने कहा कि 18 अप्रैल को तीन बजे यश को वेंटिलेटर पर रखा था।
वेंटिलेटर पर रखे जाने के बाद से ही वह बेहोश हो गया। डाक्टरों ने जो भी दवाईयां मांगी हमने सारी लाकर दी पर बच्चे को होश नहीं आया। शुक्रवार तड़के बच्चे की मौत हो गई। यश की मां स्नेहलता, दादा थथू राम और दादी सुरतू देवी ने प्रदेश सरकार से बच्चे की मौत के मामले की जांच करने की मांग की है। परिजनों का कहना कि किसी और के बच्चे के साथ ऐसा न हो। इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
मैं आउट आफ स्टेशन हूं : डा. नीलम
आईजीएमसी के बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. नीलम ग्रोवर ने कहा कि वह आउट आफ स्टेशन हैं। इस बारे में अभी कुछ भी नहीं बता सकती। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि बाल रोग विभाग से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी जाएगी। कहा कि बच्चों की जान से कोई खिलवाड़ नहीं कर रहा है।