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पूर्व सीएम शांता को लिखे पत्र में संतोष शैलजा ने लिखी थी यह बात- यादें अपने उजालों की रहने दो हमारे पास

Wed, 30 Dec 2020 11:23 AM IST
अरविन्द ठाकुर विनोद राणा, अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा)
विनोद राणा, अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 30 Dec 2020 11:23 AM IST
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Former CM shanta kumar wife letters and books story
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

यादें अपने उजालों की रहने दो हमारे पास, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए...। ये बातें संतोष शैलजा ने तब लिखीं थीं, जब शांता कुमार नाहन जेल में बंद थे। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की राजनीति की सफल बुलंदियों की हमसफर रहीं संतोष शैलजा उन्हें सदा के लिए छोड़कर चली गईं। अपने सियासी सफर में कई सदमे झेलकर भी सदा मुस्कराने वाला प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता पत्नी के गम में आखिर भावुक हो गए। 

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1964 में शादी के बाद संतोष शैलजा शांता कुमार के राजनीतिक जीवन में कदम से कदम मिलाकर चलती रहीं। यही कारण था कि शांता अपने राजनीतिक भाषणों में पत्नी का नाम लेना नहीं भूलते। संतोष को घमंड नाम की चीज कभी छू तक नहीं पाई थी। वह समाजसेविका भी थीं, जो बच्चों से खासा लगाव रखती थीं।
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साथ ही अपने पति लेखक एवं राजनीतिज्ञ शांता कुमार से उन्हें लिखने की प्रेरणा मिली थी। वह एक अच्छी लेखिका भी बनीं। उनकी पहली पुस्तक ‘जौहर के अक्षर’ के बाद तीन उपन्यास ‘अंगारों में फूल‘, ‘सुन मुटियारे’, ‘ओ प्रवासी मीत मेरे’ समेत करीब एक दर्जन पुस्तकें लिखी थीं। उनका जन्म 14 अप्रैल 1934 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। 

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राजनीतिक सफर के चलते ही शांता की उनसे मुलाकात हुई थी और बाद में दोनों शादी के सूत्र से बंध गए थे। वह काफी समय तक कन्या राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पालमपुर में शिक्षिका रहीं। शांता कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने रिटायरमेंट ले ली थी।

पति के साथ रोज करती करती थीं योग
संतोष अपने पति के साथ रोजाना सुबह उठकर करीब दो घंटे तक योग करती थीं। वह योग के कारण 83 साल की उम्र में भी काफी एक्टिव थीं।

पत्र में भेजे आंसुओं को शांता ने पहचाना था
1985 में देश में लगे आपातकालीन के चलते शांता कुमार को भी नाहन जेल में डाल दिया गया था। उनका बेटा बीमार था तो भी संतोष ने शांता को इस बारे में नहीं बताया था। उन्न्होंने जेल में बंद शांता को पत्र भेजा था। पत्र में टपके शैलजा के आंसुओं को पहचान लिया था, जबकि पत्र के अंदर संतोष शैलजा की लिखी पंक्तियां यादें अपने उजालों की रहने दो हमारे पास, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए..., जिसे पढ़कर शांता काफी भावुक हुए थे।

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