वन भूमि पर कब्जा करने वालों में अफसर और पंचायत प्रधान भी शामिल, हाईकोर्ट में खुली पोल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में प्रदेश सरकार की कागजी कार्रवाई के दावों की पोल खुल गई। एमिक्स क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बीट ऑफिसर और पंचायत प्रधान समेत ऐसे आठ बड़े कब्जाधारी हैं, जिनके खिलाफ र्कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय लोग ऐसे कब्जाधारियों की जानकारी उन्हें पत्र के माध्यम से दे रहे हैं। कोर्ट ने एमिक्स क्यूरी की रिपोर्ट देखने के बाद ताजा रिपोर्ट न देने पर प्रदेश सरकार को फटकार भी लगाई।
आदेशों की अक्षरश: अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश
कोर्ट ने सरकार को समय-समय पर पारित आदेशों की अक्षरश: अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। मामले पर आगामी सुनवाई 20 जुलाई को होगी। उधर, वन विभाग ने कोर्ट को बताया कि दो दिन के भीतर पूरी जानकारी जुटा ली जाएगी।
एक सप्ताह में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सरकार को एक सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए।
शिमला जिला की जुब्बल तहसील में बधाल गांव के पूर्व उपप्रधान बाग मल रिखटा, पूर्व उपप्रधान राजेश पिरटा, मौजूदा प्रधान महेंद्र, पंचायत सदस्य गुलट राम जेहटा, जुब्बल हाटकोटी रेंज में तैनात वन विभाग के बीट ऑफिसर (बीओ) लोकेंद्र सिंह, गीता राम पीरटा, चतर सिंह मेहता और उद्दम लाल चौ