सर्वे में खुलासा, 16 से 18 साल की छात्राएं बन रही दुराचार का शिकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश में दुराचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ज्यादातर 16 से 18 साल की लड़कियां हवस का शिकार बन रही हैं। अधिकतर मामलों में अपनों का हाथ बताया जा रहा है। यह खुलासा क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला धर्मशाला के पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों पर किए गए सर्वे में हुआ है। सर्वे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
आरएफएसएल उत्तरी रेंज धर्मशाला के सहायक निदेशक डॉ. एसके पाल ने बताया कि सर्वे 2013 से 2016 के बीच दर्ज मामलों में किया गया। इस दौरान पोक्सो एक्ट के तहत प्रदेश में 181 मामले दर्ज किए गए। इसमें कुछेम मामले कुकर्म के भी हैं। दिसंबर से मार्च माह तक करीब 31.49 प्रतिशत मासूम हवस का शिकार बने।
अप्रैल से जुलाई तक 24.30, जुलाई से सितंबर में 29.83 और अक्तूबर-नवंबर माह में 14.36 प्रतिशत मासूमों पर यौन हमले हुए हैं। सर्वे के अनुसार नाबालिगों में 16 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इनमें मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाने में पारिवारिक सदस्यों या पहचान वाले व्यक्तियों का हाथ होता है।
16 से 18 आयु वर्ग के 87 मासूमों पर हुआ जुल्म
पोक्सो एक्ट के तहत जिन 181 मामलों का निरीक्षण किया गया, उसमें 16 से 18 आयु वर्ग के 87, 11 से 13 के 61, छह से दस के 24 और पांच साल तक के नौ बच्चे यौन शोषण का शिकार हुए हैं।
पोक्सो एक्ट में दर्ज 181 मामलों पर सर्वे किया गया। इसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अधिकतर 16 से 18 साल के लड़कियां दुराचार की शिकार हो रही हैं। ज्यादातर मामलों में पारिवारिक या फिर पहचान के व्यक्तियों का हाथ रहा है। - मीनाक्षी महाजन, उपनिदेशक, आरएफएसएल धर्मशाला