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Shimla News: भवनों के बाद अब टैंकों का भी भूकंपरोधी तकनीक से निर्माण अनिवार्य
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राजधानी में भवनों के बाद अब टैंकों का भी भूकंपरोधी तकनीक से निर्माण अनिवार्य
खास खबर...
शहर में 24 घंटे पेयजल योजना के तहत शिमला में नए टैंकों के निर्माण को लेकर दिशा-निर्देश जारी
भूकंपीय जोन पांच में शामिल है शिमला शहर
निर्माण में इस्तेमाल होगी भूकंपरोधी तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बहुमंजिला भवनों के बाद अब जल भंडारण टैंकों के निर्माण में भी भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। शिमला शहर भूकंपीय जोन पांच में शामिल है। इसे देखते हुए यहां बनने वाले नए जल भंडारण टैंकों के निर्माण को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शहर में 24 घंटे पेयजल योजना के तहत 20 से अधिक बड़े जल भंडारण टैंकों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें ज्यादातर टैंकों की क्षमता 10 से 30 लाख लीटर पेयजल की होगी। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील शिमला में यदि कोई आपदा आती है तो इन टैंकों के क्षतिग्रस्त होने से नुकसान और बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए इनके निर्माण में मजबूती और सुरक्षा के मानकों का पालन अनिवार्य किया है। उपनगरों में बनने वाले इन टैंकों के लिए नगर निगम की ओर से एनओसी जारी की जा चुकी है। संजौली, फागली और कंगनाधार में टैंकों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इनके बनने से उपनगरों के हजारों उपभोक्ताओं को निर्धारित शेड्यूल और पर्याप्त प्रेशर के साथ पानी की आपूर्ति करना आसान होगा। अभी तीन से चार वार्डों में एक ही टैंक से पानी की आपूर्ति होती है। प्रत्येक वार्ड में अलग टैंक बनने से पानी की आपूर्ति का शेड्यूल तय करने में भी आसानी होगी।
पेयजल कंपनी ने सुएज इंडिया कंपनी को टैंकों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्य के दौरान इन मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। पेयजल कंपनी के एजीएम आदर्श भोटा ने कहा कि नए टैंकों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक के तहत ही किया जाएगा। इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
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ऐसे मजबूत बनेंगे नए टैंक
भूकंप की दृष्टि से अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में टैंकों के नीचे पारंपरिक नींव के बजाय प्री-एम्बेडेड स्टार्टिंग रिंग या विशेष कंक्रीट बेस बनाए जाते हैं। इससे जमीन के झटकों का प्रभाव समान रूप से वितरित होता है। भूकंप के दौरान जमीन और टैंक अलग-अलग गति से हिल सकते हैं। ऐसे में टैंक से जुड़े इनलेट और आउटलेट पाइपों में लचीले ज्वाइंट लगाए जाते हैं। टैंक के अंदर पानी की ऊपरी सतह और छत के बीच खाली जगह छोड़ी जाती है, इसे फ्रीबोर्ड कहते हैं। इससे भूकंप के दौरान पानी में उठने वाली लहरें टैंक की छत से टकराकर उसे नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।
भवन निर्माण में पहले से लागू है यह शर्त
शिमला शहर में भवन निर्माण के दौरान भूकंपरोधी तकनीक के इस्तेमाल की शर्त पहले से लागू है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां तीखी ढलान और कमजोर जमीन को देखते हुए नगर निगम भवनों के नक्शे के आवेदन के समय ही भूकंपरोधी तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करता है। 45 डिग्री से अधिक ढलान वाले क्षेत्रों में निर्माण के लिए कई शर्तें लागू की गई हैं।
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शहर में 24 घंटे पेयजल योजना के तहत शिमला में नए टैंकों के निर्माण को लेकर दिशा-निर्देश जारी
भूकंपीय जोन पांच में शामिल है शिमला शहर
निर्माण में इस्तेमाल होगी भूकंपरोधी तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बहुमंजिला भवनों के बाद अब जल भंडारण टैंकों के निर्माण में भी भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। शिमला शहर भूकंपीय जोन पांच में शामिल है। इसे देखते हुए यहां बनने वाले नए जल भंडारण टैंकों के निर्माण को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शहर में 24 घंटे पेयजल योजना के तहत 20 से अधिक बड़े जल भंडारण टैंकों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें ज्यादातर टैंकों की क्षमता 10 से 30 लाख लीटर पेयजल की होगी। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील शिमला में यदि कोई आपदा आती है तो इन टैंकों के क्षतिग्रस्त होने से नुकसान और बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए इनके निर्माण में मजबूती और सुरक्षा के मानकों का पालन अनिवार्य किया है। उपनगरों में बनने वाले इन टैंकों के लिए नगर निगम की ओर से एनओसी जारी की जा चुकी है। संजौली, फागली और कंगनाधार में टैंकों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इनके बनने से उपनगरों के हजारों उपभोक्ताओं को निर्धारित शेड्यूल और पर्याप्त प्रेशर के साथ पानी की आपूर्ति करना आसान होगा। अभी तीन से चार वार्डों में एक ही टैंक से पानी की आपूर्ति होती है। प्रत्येक वार्ड में अलग टैंक बनने से पानी की आपूर्ति का शेड्यूल तय करने में भी आसानी होगी।
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पेयजल कंपनी ने सुएज इंडिया कंपनी को टैंकों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्य के दौरान इन मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। पेयजल कंपनी के एजीएम आदर्श भोटा ने कहा कि नए टैंकों का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक के तहत ही किया जाएगा। इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
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ऐसे मजबूत बनेंगे नए टैंक
भूकंप की दृष्टि से अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में टैंकों के नीचे पारंपरिक नींव के बजाय प्री-एम्बेडेड स्टार्टिंग रिंग या विशेष कंक्रीट बेस बनाए जाते हैं। इससे जमीन के झटकों का प्रभाव समान रूप से वितरित होता है। भूकंप के दौरान जमीन और टैंक अलग-अलग गति से हिल सकते हैं। ऐसे में टैंक से जुड़े इनलेट और आउटलेट पाइपों में लचीले ज्वाइंट लगाए जाते हैं। टैंक के अंदर पानी की ऊपरी सतह और छत के बीच खाली जगह छोड़ी जाती है, इसे फ्रीबोर्ड कहते हैं। इससे भूकंप के दौरान पानी में उठने वाली लहरें टैंक की छत से टकराकर उसे नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।
भवन निर्माण में पहले से लागू है यह शर्त
शिमला शहर में भवन निर्माण के दौरान भूकंपरोधी तकनीक के इस्तेमाल की शर्त पहले से लागू है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां तीखी ढलान और कमजोर जमीन को देखते हुए नगर निगम भवनों के नक्शे के आवेदन के समय ही भूकंपरोधी तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करता है। 45 डिग्री से अधिक ढलान वाले क्षेत्रों में निर्माण के लिए कई शर्तें लागू की गई हैं।