जानिए वे 5 वजह, जिससे ब्यास में बह गए छात्र?
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मंडी का थलौट क्षेत्र जहां पर हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र ब्यास में बह गए, वहां कोई भी साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है जिससे ये छात्र अलर्ट हो पाते। जो साइन बोर्ड कहीं लगे भी हैं वे पढ़ने लायक नहीं रहे।
यही नहीं थलौट जैसे खतरनाक स्थलों के अलावा अन्य जगहों पर भी आगाह करने वाले साइन बोर्ड नहीं थे। पर्यटकों को क्या पता था कि बांध से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है। इन दिनों हजारों सैलानी हिमाचल में ऐसी जगहों पर ही सैर के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यह जिम्मेदारी इन विभागों की बनती है कि वे इन्हें अलर्ट करें।
एक के बाद एक हादसा होने के बावजूद आज तक नदी के किनारे न तो फेंसिंग की व्यवस्था की गई और न ही गायब हो चुके चेतावनी बोर्ड दोबारा लगाए गए।
ढाई घंटे बाद शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
यह हादसा रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे हुआ जबकि रेस्क्यू टीम को मौके पर पहुंचने में ढाई घंटे लग गए। उच्च अधिकारियों को इस हादसे की सूचना तक नहीं दी गई।
वहीं, छात्र चीख चीखकर यह बताते रहे कि उनके दोस्त पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। कोई उन्हें बचाए लेकिन मौके पर पहुंचे अधिकारी व कर्मचारी इसे दूसरे जिले का मामला होने की बात कहकर कोई कदम उठाने से कतराते रहे।
यदि रेस्क्यू ऑपरेशन समय से शुरू होता तो काफी छात्रों की जानें बच सकती थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
तीन किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती आवाज?
राज्य विद्युत परिषद के लारजी डैम से घटनास्थल थलौट लगभग तीन किलोमीटर दूर हैं। सायरन लारजी में लगे हैं, अगर सायरन बजा भी तो क्या तीन किलोमीटर दूर किसे सुनाई देता।
और क्या सायरन बजाकर डैम प्रबंधन अपना पल्ला नहीं झाड़ रहा। बाहरी राज्यों से आए सैलानियों को क्या पता कि सायरन किस लिए बज रहा है।
लेकिन दूसरी हकीकत यह भी है कि सायरन बजाया ही नहीं गया था। अब खुद को सही साबित करने के लिए विभाग सायरन बजाने के दावे कर रहा है। सीएम ने खुद माना कि घटनास्थल तक सायरन की आवाज नहीं पहुंच पाई थी।
विभाग का दावा छात्रों ने भी बरती लापरवाही?
उधर, इस घटना के बाद विद्युत विभाग छात्रों की लापरवाही के भी दावे कर रहा है। रविवार शाम छह बजे के आसपास जैसे ही छात्र ब्यास में उतरकर बीच नदी में पत्थरों पर चढ़कर पानी से खेलने और फोटो खिंचवाने लगे तो विद्युत सब डिवीजन में तैनात प्रत्यक्षदर्शी मनोज कुमार और महेश कुमार ब्यास के बढ़ते जलस्तर को भांप गए थे।
मनोज के अनुसार 6.15 बजे के आसपास वह बच्चों के चिल्लाने और मस्ती मारने की आवाज सुनकर विद्युत सब स्टेशन के सरकारी क्वार्टर से बाहर आया और दीवार पर चढ़कर छात्रों को नदी से बाहर आने के लिए चिल्लाने लगा। उसने आगाह किया था कि पानी कभी भी बढ़ सकता है बाहर आ जाओ।
मनोज के अनुसार उसकी चेतावनी को छात्रों ने अनसुना कर दिया। उसके बाद पल भर में ब्यास की लहरों के साथ मस्ती कर रहे दो दर्जन छात्र तेज बहाव में बह गए।
बढ़ते जलस्तर के बावजूद नहीं उठाए कदम
उत्तरी ग्रिड से बिजली की डिमांड कम हो गई थी। इसलिए रविवार को लारजी में कम बिजली उत्पादन हुआ। इसके चलते डैम से तीन शिफ्टों में पानी छोड़ा गया।
इसके अलावा गर्मी बढ़ने से यहां की नदियों में जल स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली बोर्ड के जल विद्युत परियोजनाओं से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है।
पानी के बढ़ते जलस्तर और बिजली की कम डिमांड के कारण आए दिन नदी में अतिरिक्त पानी को छोड़ा जाना है। इसके बावजूद बोर्ड ने ऐसे कोई कदम नहीं उठाए हैं जिससे निचले इलाकों में नदी के दोनों ओर रहने वाले लोग व सैलानी अलर्ट हो सके।