एचपीयू में खूनी संघर्ष, दो दर्जन से अधिक छात्र घायल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एसएफआई और एबीवीपी छात्र संगठनों के बीच हुए खूनी संघर्ष में दो दर्जन से अधिक छात्र घायल हुए हैं। मैदान को लेकर हुई लड़ाई इतनी उग्र हो गई कि हुड़दंगी कार्यकर्ताओं ने छात्रावासों में घुसकर भी कई छात्रों को डंडों और रॉड से पीट डाला।
इस हिंसा में दो दर्जन से अधिक छात्रों को चोटें लगी हैं। इनमें से 19 छात्रों को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया है। पुलिस के अनुसार समरहिल के साथ लगते पोटरहिल मैदान पर एसएफआई कार्यकर्ता क्रिकेट मैच खेल रहे थे।
इसी दौरान एबीवीपी और आरएसएस से जुड़े छात्र यहां पहुंचे। इनका कहना था कि उन्हें मैदान पर आरएसएस की शाखा लगानी है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहसबाजी शुरू हो गई।
बात इतनी बढ़ गई कि दोनों संगठन डंडे, रॉड, क्रिकेट बैट और विकेट लेकर एक दूसरे पर टूट पड़े। काफी देर तक यह खूनी संघर्ष चलता रहा। इसमें एक दर्जन से अधिक छात्र लहूलुहान हो गए।
मैदान के बाद कई कार्यकर्ता डंडे और रॉड लेकर टैगोर और श्रीखंड हॉस्टल में घुस गए। यहां कमरों में ठहरे कई छात्रों को पीट दिया। हॉस्टलों में तोड़फोड़ भी की गई है। विवि प्रशासन के अनुसार चार कमरों का सामान तोड़ा गया है।
इनके खिड़कियां और दरवाजे तोड़े गए हैं। यहां भी करीब एक दर्जन छात्रों से मारपीट की गई है। वार्डनों ने छात्रों के मारपीट की सूचना तुरंत पुलिस को दी। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्रों को अस्पताल पहुंचाया।
विवि परिसर में हुए इस घटनाक्रम पर सीएम जयराम ठाकुर ने जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। कहा कि यह हिमाचल प्रदेश है इसे पश्चिमी बंगाल नहीं बनने देंगे। कहा कि डीजीपी और एसपी से बात हो गई है। मामले में जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एचपीयू के छात्रावासों के कमरों में मिले सरिये, डंडे और पत्थर
प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्रावासों में हथियारों का जखीरा मिलने से विवि प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। हिंसा की घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीमों ने छात्रावासों में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान कई कमरों से भारी मात्रा में डंडे, रॉड, सरिये, पत्थर बरामद किए गए हैं। छात्रावासों में तलाशी अभियान चलाया गया।
कमरों से भारी मात्रा में मिले हथियारों को देखकर बाकी छात्र भी सहम गए। आखिर छात्रावासों में यह हथियार कब, कहां से और किसने पहुंचाए, इस पर विवि प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। हर बार प्रशासन छात्रावासों की निगरानी बढ़ाने का दावा करता है, लेकिन छात्र मारपीट का सामान कमरों में जमा कर रहे हैं, इसकी भनक तक नहीं है।
जिस समय छात्रावासों में घुसकर हमला किया गया, उस समय भी गेट पर न तो वार्डन थे और न ही कोई सुरक्षा कर्मी। आम छात्रों का कहना है कि प्रशासन ऐसी घटनाओं के कुछ दिन तक तो सतर्क रहता है, लेकिन बाद में वही गुंडागर्दी शुरू हो जाती है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने किया हमला
रोज की तरह मैदान में खेल रहे थे कि अचानक एबीवीपी, कुछ आउटसाइडर्स और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने डंडे और रॉड से हमला कर दिया। हमले में सात छात्रों को गंभीर चोटें लगी हैं। - विक्रम ठाकुर, कैंपस अध्यक्ष एसएफआई
एसएफआई ने आम छात्रों को पीटा
पिछले दस दिन से आरएसएस की शाखा यहां लग रही है। एसएफआई कार्यकर्ता शाखा में छात्रों को परेशान कर रहे थे। अचानक ये डंडे लेकर आए और मारपीट करने लगे। हॉस्टल में भी छात्रों को पीटा गया है। - अंकित, कैंपस सचिव, एबीवीपी
एफआईआर दर्ज करवा दी है
जिस मैदान को लेकर यह हिंसा हुई, वह विवि का नहीं है। दोनों संगठनों में विवि परिसर से बाहर मारपीट हुई। बाद में हॉस्टल के भीतर भी हाथापाई हुई। दो हॉस्टलों के कई कमरों का सामान टूटा है। हमने पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है। दोषी छात्रों को बख्शा नहीं जाएगा। हॉस्टल में हथियार कहां से आए, इसकी जांच की जाएगी। - प्रो. नैन सिंह, चीफ वार्डन एचपीयू