एसएफआई के प्रदर्शन में सुरक्षा कर्मियों से धक्का-मुक्की, फाड़े कपड़े
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एसएफआई की विवि इकाई ने डीसी ऑफिस, प्रशासनिक भवन गेट और कुलसचिव कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं की पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्का मुक्की भी हुई। प्रदर्शन निजी कॉलेज में अध्यादेश को नजरअंदाज करने के मामले को लेकर हुआ।
सुरक्षा कर्मियों ने कार्यकर्ताओं को कार्यालय के बाहर हटाने का प्रयास किया। इस बीच दोनों और से धक्का मुक्की हो गई। कार्यकर्ताओं ने पुलिस और सुरक्षा कर्मियों पर धक्के मारने, कपड़े फाड़ने के आरोप लगाए।
कार्यकर्ताओं ने विवि से संबद्ध कांगड़ा के एक निजी कॉलेज पर एमसीए में अध्यादेश और प्रवेश के नियमों को दरकिनार कर प्रवेश देने के आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। कुलसचिव से मिलने जा रहे कार्यकर्ताओं को सुरक्षा और पुलिस कर्मियों ने रोकने का प्रयास किया।
इस मांग को लेकर अड़े कार्यकर्ता
कार्यकर्ता कुलसचिव कार्यालय के बाहर पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। कुलसचिव प्रो. एसएस नारटा ने कार्यकर्ताओं को शांत करवाने का प्रयास किया। कार्यकर्ता उक्त कॉलेज की संबद्धता को रद्द किए जाने की मांग पर अडे़ रहे।
कुलसचिव ने कार्यकर्ताओं को यह कहकर शांत किया कि 18 दिसंबर को कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान विवि आएंगे। उनके आने पर वह स्वयं एसएफआई के प्रतिनिधियों को साथ लेकर इस मामले पर चर्चा करेंगे। इकाई अध्यक्ष अनिल नेगी का आरोप है कि पुलिस और विवि सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ धक्का मुक्की मारपीट की।
यह है पूरा मामला
सत्र 2016 में एचपीयू ने विवि से संबद्ध एक निजी कॉलेज में एमसीए की सीट भरने के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट करवाया। कोई भी प्रवेश को न्यूनतम तय अंक हासिल नहीं कर पाया। तत्कालीन कुलपति ने अध्यादेश में ढील बरत कर अपने स्तर पर सीटें भरने की अनुमति दे दी।
अध्यादेश के मुताबिक प्रोफेशनल कोर्स में निजी कॉलेज अपने स्तर पर सीटें नहीं भर सक ता। 2017 में डीएस कार्यालय और वर्तमान कुलपति ने 2016 की छूट का हवाला देकर दोबारा से अपने स्तर पर प्रवेश देेने की अधिसूचना जारी कर दी। एसएफआई ने इसे आर्डिनेंस की अनदेखी करार दिया है।
कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक भवन में घुसने से रोका : सुरेश चौहान
विवि के सुरक्षा अधिकारी डीएसपी सुरेश चौहान ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक भवन में जबरन घुसने का प्रयास किया। उन्हें गेट पर ही रोका गया। इसी दौरान धक्का मुक्की हुई। दो या तीन लोगों को अंदर जाने को कहा।