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भाजपा के घोषणा पत्र से किसान बागवान नाराज
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भाजपा के घोषणा पत्र से
किसान-बागवान नाराज
संयुक्त किसान मंच ने लगाया अनदेखी का आरोपी
घोषणा पत्र में मंच के 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी पर जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भाजपा के घोषणा पत्र को संयुक्त किसान मंच ने किसान बागवानों के लिए निराशाजनक करार दिया है। मंच का कहना है कि घोषणा पत्र में किसानों और बागवानों के हित के लिए कोई घोषणा न होने से नाराजगी है। संयुक्त किसान मंच ने भाजपा के घोषणा पत्र में 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी पर रोष जताया है।
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि बीते पांच सालों में सरकार ने किसानों और बागवानों के प्रति सौतेला व्यवहार अपनाया। अब चुनाव से पहले जारी किए घोषणा पत्र में भी अनदेखी की है। सेब पैकेजिंग सामग्री पर जीएसटी 12 फीसदी तक सीमित करने की घोषणा सरकार ने बागवानों के आंदोलन के बाद 6 जुलाई की बैठक में कर दी थी। बकाया जीएसटी बागवानों के खाते में लौटाने का दावा किया था लेकिन एक भी बागवान को पैसा नहीं मिला। कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस, एपीएमसी एक्ट लागू करने, सेब पर आयात शुल्क सौ फीसदी करने, खादों कीटनाशकों और उपकरणों पर अनुदान बहाल करने को लेकर सरकार ने कोई घोषणा नहीं की।
किसान-बागवानों के मुद्दों पर औपचारिकता : सेहटा
शिमला। यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन के महासचिव प्रशांत सेहटा ने कहा कि राजनीतिक दलों ने किसानों और बागवानों के मुद्दों को महज औपचारिकता के लिए घोषणा पत्र में जगह दी है। भाजपा ने जहां पूरी तरह भ्रमित करने का प्रयास किया है वहीं कांग्रेस ने भी सिर्फ एमएसपी देने और फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की घोषणा की है। सीपीआईएम ने आयत शुल्क सौ फ ीसदी करने, सीए स्टोर के लिए 90 फ ीसदी अनुदान, सभी फ सलों का बीमा, ऋ ण माफ करने का वादा किया है, लेकिन माकपा महज 11 सीटों पर लड़ रही है और विपक्ष की भूमिका में ही रहेगी।
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किसान-बागवान नाराज
संयुक्त किसान मंच ने लगाया अनदेखी का आरोपी
घोषणा पत्र में मंच के 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी पर जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भाजपा के घोषणा पत्र को संयुक्त किसान मंच ने किसान बागवानों के लिए निराशाजनक करार दिया है। मंच का कहना है कि घोषणा पत्र में किसानों और बागवानों के हित के लिए कोई घोषणा न होने से नाराजगी है। संयुक्त किसान मंच ने भाजपा के घोषणा पत्र में 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी पर रोष जताया है।
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि बीते पांच सालों में सरकार ने किसानों और बागवानों के प्रति सौतेला व्यवहार अपनाया। अब चुनाव से पहले जारी किए घोषणा पत्र में भी अनदेखी की है। सेब पैकेजिंग सामग्री पर जीएसटी 12 फीसदी तक सीमित करने की घोषणा सरकार ने बागवानों के आंदोलन के बाद 6 जुलाई की बैठक में कर दी थी। बकाया जीएसटी बागवानों के खाते में लौटाने का दावा किया था लेकिन एक भी बागवान को पैसा नहीं मिला। कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस, एपीएमसी एक्ट लागू करने, सेब पर आयात शुल्क सौ फीसदी करने, खादों कीटनाशकों और उपकरणों पर अनुदान बहाल करने को लेकर सरकार ने कोई घोषणा नहीं की।
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किसान-बागवानों के मुद्दों पर औपचारिकता : सेहटा
शिमला। यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन के महासचिव प्रशांत सेहटा ने कहा कि राजनीतिक दलों ने किसानों और बागवानों के मुद्दों को महज औपचारिकता के लिए घोषणा पत्र में जगह दी है। भाजपा ने जहां पूरी तरह भ्रमित करने का प्रयास किया है वहीं कांग्रेस ने भी सिर्फ एमएसपी देने और फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की घोषणा की है। सीपीआईएम ने आयत शुल्क सौ फ ीसदी करने, सीए स्टोर के लिए 90 फ ीसदी अनुदान, सभी फ सलों का बीमा, ऋ ण माफ करने का वादा किया है, लेकिन माकपा महज 11 सीटों पर लड़ रही है और विपक्ष की भूमिका में ही रहेगी।
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