मटर के रेट धड़ाम, बिचौलियों की जेब में जा रहा मुनाफा
हिमाचल में मटर की अच्छी फसल होने के बावजूद इसके रेट धड़ाम हो गए हैं और इसका मुनाफा बिचौलियों की जेब में जा रहा है। मार्केट में माल ज्यादा आने की बात कहकर आढ़ती मटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक खरीद रहे हैं और उपभोक्ताओं को 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है।
यानी किसानों को पैदावार की लागत भी नहीं मिल पा रही है और बिचौलियों की जेब में 35 से 45 रुपये प्रति किलो तक जा रहे हैं। आजकल शिमला, सोलन, मंडी, कुल्लू, चंबा आदि जिलों का मटर मंडियों में पहुंच रहा है।
किसानों के नाम पर वोटें बटोरने के लिए बेशक हर राजनीतिक दल बडे़-बड़े दावे कर रहे हो, मगर धरातल पर किसान तो पिसता ही नजर आ रहा है। पिछले कुछ समय से मटर की अच्छी फसल हुई तो किसानों के चेहरे खिल गए।
जिन किसानों ने मटर बोए थे, वे यह मानकर चल रहे थे कि इस बार अच्छा मुनाफा कमा लेंगे मगर अब वे मायूस हो गए हैं। जहां कुछ वक्त पहले किसानों से खरीद के दाम 90 से 100 रुपये प्रति किलो रहे, वहीं अब इनका एकाएक गिरना चौंका रहा है।
रेट में इतना फर्क क्यों, जांच होगी
आढ़तियों और लदानियों की ओर से किसानों को कहा जा रहा है कि इसका कारण अधिक फसल है। मगर आढ़तों से थोड़ी ही दूरी पर परचून की दुकानें देखी जाएं तो वहां मटर खूब महंगा बिक रहा है।
शिमला के पलाना गांव के किसान संदीप शर्मा का कहना है कि उनके पास मटर की अच्छी पैदावार है, मगर बाजार में अच्छे रेट नहीं मिल पाने के कारण वह इसकी तुड़ाई ही नहीं कर पा रहे हैं।
ढली सब्जी मंडी में मटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो भी रेट हैं। बहाना बढ़िया और कम बढ़िया मटर का है। संदीप शर्मा का आरोप है कि इसी मटर को उपभोक्ताओं को 60 रुपये तक बेचा जा रहा है।
मंडियों में किसानों से खरीदे जा रहे और परचून में बेचे जा रहे मटर के रेट में इतना फर्क क्यों है। इसकी जांच की जाएगी। किसानों से अगर किसी तरह की धोखाधड़ी हो रही है तो इस पर कार्रवाई होगी। वरिष्ठ मार्केटिंग अधिकारी को पूरी जांच-पड़ताल के लि फील्ड में भेजा जाएगा। - आरके कौंडल, प्रबंध निदेशक, हिमाचल प्रदेश कृषि उपज मार्केटिंग बोर्ड, हिमाचल प्रदेश।